सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट से गुजर रही हैं। जिला के आयुर्वेदिक अस्पतालों और हेल्थ सेंटरों में दवाइयों का स्टॉक लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है।
सरकारी अस्पताल में मरीज परेशान
हालात ऐसे हैं कि मरीजों को अस्पतालों में सिर्फ 4-5 प्रकार के चूर्ण मिल पा रहे हैं, जबकि बाकी दवाओं के लिए उन्हें बाजारों की ओर रुख करना पड़ रहा है। यह स्थिति खासकर उन मरीजों के लिए गंभीर है, जिनका लंबे समय से आयुर्वेदिक इलाज चल रहा है।
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तीन महीने से खत्म स्टॉक
स्थानीय लोगों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से आयुर्वेदिक संस्थानों में नया स्टॉक आया ही नहीं। जितना स्टॉक पहले उपलब्ध था, वह भी अब लगभग समाप्त हो चुका है।
सिर्फ चूर्ण के सहारे मरीज
कई अस्पतालों में दवा काउंटरों की स्थिति यह है कि केवल कुछ चूर्ण और पाउडर उपलब्ध है। टेबलेट्स, आरिष्ट-आसव, वटी, गुग्गुलु और विशेष औषधियां पूरी तरह खत्म हो चुकी है। इसके चलते मरीज अस्पतालों से निराश होकर लौट रहे हैं, और जिन्हें इलाज जारी रखना है, वे मजबूरी में बाजार से महंगी दवाएं खरीद रहे हैं।
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89 आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटरों में स्थिति गंभीर
सिरमौर जिले में 89 आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटरों की स्थिति गंभीर है। इसमें 1 जिला आयुष अस्पताल (नाहन), पांवटा साहिब क्षेत्र के आयुर्वेदिक संस्थान और कुल 89 आयुर्वेदिक हेल्थ सेंटर
लगातार दवा संकट का सामना कर रहे हैं। अक्टूबर तक जहां 20% दवा स्टॉक बचा हुआ बताया गया था, अब वह लगभग खत्म हो चुका है।
जिन दवाओं की नहीं मिल रही सप्लाई
मरीजों के अनुसार अस्पतालों में इन प्रमुख दवाओं का स्टॉक पूरी तरह समाप्त है। इन दवाओं की कमी आयुर्वेदिक इलाज पर निर्भर मरीजों की स्थिति को और कठिन बना रही है। जिनमें-
- त्रिभुवन कीर्ति रस, लक्ष्मी विलास रस
- चित्रक हरीतकी, ब्राह्मी वटी
- योगराज गुग्गुलु, त्रिफला गुग्गुलु, कैशोर गुग्गुलु
- वातगजांकुश रस, त्रयोदसांग गुग्गुलु
- चित्रकादि वटी, शंख वटी, अग्नितुण्डि वटी
- सितोपलादि, तालिसादि, अविपत्तिकर चूर्ण
- अर्जुनारिष्ट, दशमूलारिष्ट, सरस्वतारिष्ट, कुटजारिष्ट
- द्राक्षासव, चंदनासव
- महानारायण तेल, पंचगुण तेल सहित दर्जनों प्रमुख औषधियां
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अस्पतालों में भीड़ तो है, इलाज अधूरा
हैंडपंपों के पास छांव में बैठकर पर्ची थामे मरीज कहते दिख जाते हैं दवा नहीं है तो यहां आने का क्या फायदा? डॉक्टर कहते हैं बाहर से खरीद लो, पर बाहर कीमत दोगुनी-तीन गुनी है। कुछ बुजुर्ग मरीज, जिन्हें सालों से आयुर्वेदिक औषधि पर राहत मिल रही थी, अब इलाज छुड़ने के डर से चिंतित हैं।
नहीं पहुंच रहा नया स्टॉक
वहीं, जिला आयुष अधिकारी, सिरमौर डॉ. इंदु शर्मा ने स्थिति की पुष्टि करते हुए कहा कि दवाओं का नया स्टॉक अभी नहीं पहुंचा, इसलिए परेशानी आ रही है। विभिन्न प्रकार के चूर्ण की सीमित मात्रा अवश्य उपलब्ध करवाई जा रही है। दवाओं की सप्लाई के लिए टेंडर और अन्य औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं। जल्द ही नई सप्लाई अस्पतालों में पहुंचने की उम्मीद है।
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मरीजों की सरकार से मांग
स्थानीय लोगों और मरीजों ने सरकार और विभाग से आग्रह किया है कि दवाओं की सप्लाई तत्काल भेजी जाए। आयुर्वेदिक दवाओं के नियमित वितरण के लिए एक स्थायी प्रणाली बनाई जाए ताकि मरीजों को महंगी दवाएं बाजार से लेने के लिए मजबूर न होना पड़े।
