शिमला। दिल्ली में आयोजित AI समिट के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन की गूंज हिमाचल प्रदेश तक पहुंची और बुधवार को शिमला में दो राज्यों की पुलिस आमने-सामने आ गई। इंडियन यूथ कांग्रेस के तीन नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच करीब 18 घंटे तक कानूनी और प्रशासनिक टकराव चलता रहा।
कैसे शुरू हुआ मामला?
20 फरवरी को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित AI समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता अचानक कार्यक्रम स्थल में घुस गए। आरोप है कि उन्होंने शर्ट उतारकर प्रधानमंत्री की तस्वीर वाली टी-शर्ट लहराई और नारेबाजी की।
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सिविल ड्रेस में पहुंची टीम
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने BNS की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। जांच के दौरान तीन नेताओं अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ के हिमाचल में होने की सूचना मिली। बुधवार तड़के दिल्ली पुलिस की 18 सदस्यीय टीम सादे कपड़ों में तीन गाड़ियों से शिमला जिला के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव क्षेत्र पहुंची।
होटल से गिरफ्तारी
यहां एक होटल में ठहरे तीनों नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने होटल के रजिस्टर और CCTV की DVR भी अपने कब्जे में ले ली। बताया गया कि गिरफ्तारी की कार्रवाई स्थानीय पुलिस को औपचारिक सूचना दिए बिना की गई। यही आगे चलकर विवाद की वजह बना।
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हिमाचल पुलिस ने तीन जगह लगाई नाकेबंदी
जब स्थानीय पुलिस को इस कार्रवाई की जानकारी मिली तो उसने तुरंत शिमला बस स्टैंड, शोघी और सोलन के धर्मपुर में नाकेबंदी कर दी। अलग-अलग स्थानों पर दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को रोका गया।
हिमाचल पुलिस का कहना था कि किसी भी राज्य में गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बाहर ले जाने के लिए विधिसम्मत प्रक्रिया और ट्रांजिट रिमांड जरूरी है। उचित दस्तावेज न होने के कारण तीनों नेताओं को अपनी कस्टडी में लेकर शिमला कोर्ट लाया गया।
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कोर्ट में आमने-सामने आईं दोनों पुलिस
शाम करीब 5 बजे शिमला की अदालत में सुनवाई शुरू हुई। हिमाचल पुलिस ने दलील दी कि उन्हें पहले से सूचना नहीं दी गई और कार्रवाई में स्थानीय कानून-व्यवस्था की अनदेखी हुई। वहीं दिल्ली पुलिस का पक्ष था कि उनके पास वैध गिरफ्तारी वारंट है और वे कानून के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने पूरी फाइल प्रस्तुत करने को कहा। इसी बीच शाम साढ़े सात बजे दिल्ली पुलिस तीनों को दोबारा अपने साथ ले जाने लगी, लेकिन शोघी के पास फिर उन्हें रोक लिया गया।
वैध दस्तावेज पर विवाद
हिमाचल पुलिस ने स्पष्ट किया कि बिना ट्रांजिट रिमांड के आरोपियों को राज्य से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। चेतावनी दी गई कि यदि जबरन ले जाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। आखिरकार तीनों नेताओं को दोबारा हिमाचल पुलिस की हिरासत में लिया गया।
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FIR की दी चेतावनी
रात करीब 11:30 बजे तीनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। तड़के करीब 3 बजे उन्हें न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड की अनुमति मिली। इसके बाद गुरुवार सुबह लगभग 5:45 बजे दिल्ली पुलिस तीनों को लेकर दिल्ली रवाना हो गई।
जांच में क्या सामने आ रहा है?
सूत्रों के मुताबिक, तीनों नेता 24 फरवरी से हिमाचल में ठहरे थे। होटल में कमरा किसके नाम पर बुक था और उनसे मिलने कौन-कौन आया, इसकी जांच की जा रही है। होटल प्रबंधन की शिकायत पर स्थानीय स्तर पर भी मामला दर्ज किया गया है।
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शिमला के ASP ने कहा कि रिसॉर्ट मालिक की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ, क्योंकि कथित तौर पर DVR बिना रसीद के ले जाई गई थी और मेहमानों को उठाने की प्रक्रिया पर सवाल उठे।
राजनीतिक और कानूनी असर
यह घटनाक्रम केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दो राज्यों की पुलिस के अधिकार क्षेत्र और प्रक्रिया को लेकर बहस का विषय बन गया। AI समिट में हुए प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद अब कानूनी दांव-पेंच और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच चुका है।
आने वाले दिनों में अदालत में सुनवाई के दौरान यह साफ होगा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में किस पक्ष की दलील कितनी ठोस थी। फिलहाल, यह मामला हिमाचल और दिल्ली दोनों जगह चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
