कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है। प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक मरीजों को आए दिन उपचार, दवाइयों और जरूरी जांच सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है। कहीं डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी सामने आती है तो कहीं जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ती है।

सरकारी अस्पतालों का बुरा हाल...

गंभीर स्थिति में मरीजों को जिला अस्पतालों से मेडिकल कॉलेजों या दूसरे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर किया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है। कई बार तो इस दौरान मरीज की मौत भी हो जाती है। ताजा मामला कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी अस्पताल से सामने आया है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल: पिता के बाद अब 18 वर्षीय बेटी की भी सतलुज नदी में मिली देह, 12 दिन से थे लापता

23 वर्षीय महिला की मौत

ज्वालामुखी अस्पताल में प्रसव के बाद एक 23 वर्षीय महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने और बाद में टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान उसकी मौत हो जाने से मामला गरमा गया है। महिला ने ज्वालामुखी अस्पताल में एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था।

 

क्या हुआ महिला के साथ?

प्रसव के लगभग एक घंटे बाद उसे अचानक अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। हालत गंभीर होने पर उसे टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

यह भी पढ़ें-  हिमाचल के शौर्यन को GOOGLE में मिली नौकरी: सालाना 50 लाख का पैकेज, परिवार में खुशी

परिजनों का फूटा गुस्सा

महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद परिजन ज्वालामुखी अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ रोष जताया। इस दौरान परिजनों ने नारेबाजी करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और अगर उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई।

मृतका की पहचान

मृतका की पहचान 23 वर्षीय त्रिकला देवी के रूप में हुई है- जो कि तरीड़ी (मझीन) की रहने वाली थी। त्रिकला देवी की शादी करीब दो वर्ष पहले दीपक डोगरा के साथ हुई थी। दीपक दिहाड़ी मजदूरी करता है और परिवार का बड़ा बेटा है। परिवार को उम्मीद थी कि बच्चे के जन्म के बाद घर में खुशियां आएंगी। मगर त्रिकला की मौत के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में नशा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई, गाड़ियां- गोल्ड बिस्किट, मकान और बैंक खाते किए सीज

अस्पताल में कब एडमिट हुई महिला?

परिजनों के अनुसार त्रिकला देवी को बुधवार सुबह करीब 5 बजे प्रसव के लिए ज्वालामुखी अस्पताल लाया गया था। दिनभर चिकित्सकीय निगरानी के बाद शाम करीब साढ़े 3 बजे उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन कुछ ही देर बाद परिस्थितियां अचानक बदल गईं।

 

कब हुई महिला की डिलीवरी?

परिजनों का कहना है कि डिलीवरी के लगभग एक घंटे बाद महिला को अचानक काफी अधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। देखते ही देखते उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने सवाल उठाया कि जब प्रसव के बाद महिला की स्थिति गंभीर होती जा रही थी तो उसे उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए कब रेफर किया गया और उससे पहले अस्पताल में किस तरह का उपचार किया गया।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में जारी हुआ भारी से भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, विदाई से पहले मानसून दिखाएग रौद्र रूप

परिजनों ने क्या लगाए आरोप?

परिजनों का आरोप है कि महिला को काफी रक्तस्राव होने के बाद टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया। उनका कहना है कि अगर स्थिति पहले ही गंभीर थी और ज्वालामुखी अस्पताल में आवश्यक उपचार की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं थी- तो महिला को बिना समय गंवाए उच्च संस्थान भेजा जाना चाहिए था।

उठ रहे कई गंभीर सवाल

  • महिला को वास्तव में किस समय रेफर किया गया?
  • रेफरल में देरी क्यों की गई?
  • रेफर करने से पहले उसकी स्थिति क्या थी?
  • महिला को कितना रक्तस्राव हुआ?
  • अस्पताल में उसे कौन-कौन से उपचार दिए गए?
  • महिला को अस्पताल में क्या दवाएं और उपचार दिए गए?
  • महिला की हालत को स्थिर करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए?
  • टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया?

यह भी पढ़ें- हिमाचल की सड़कों पर दौड़ेंगी 350 नई बसें- पुरानी होंगी बेड़े से बाहर, कल लिया जाएगा फैसला

क्या बोले अस्पताल के BMO?

वहीं, ज्वालामुखी अस्पताल के बीएमओ डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि महिला की डिलीवरी अस्पताल में शाम करीब साढ़े 3 बजे हुई थी। डिलीवरी के बाद उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया था। करीब एक घंटे बाद अचानक महिला को काफी अधिक ब्लीडिंग शुरू हो गई। चिकित्सकीय भाषा में प्रसव के बाद होने वाले इस तरह के अत्यधिक रक्तस्राव को पोस्टपार्टम हैमरेज कहा जाता है।

डॉक्टरों ने महिला को किया रेफर

महिला की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने तत्काल स्थिति को संभालने तथा रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक प्रयास किए। इसके बाद महिला को उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर किया गया। महिला को टांडा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

यह भी पढ़ें- आजादी के बाद भी सड़क से दूर हैं हिमाचल के ये गांव : देह पहुंचाना भी कठिन, हजारों लोग परेशान

परिजनों ने लिखित में दी शिकायत

डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि महिला के परिजन अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। परिजनों की ओर से लिखित शिकायत भी ली गई है। उन्होंने कहा कि मामले की उचित जांच करवाकर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा परिजनों को दिया गया है।

डिलीवरी के बाद क्यों बिगड़ी महिला की हालत?

शर्मा ने कहा कि पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। जांच में प्रसव के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारणों के साथ-साथ अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड और उसे दिए गए उपचार की भी समीक्षा की जाएगी।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में बदलेगा बिजली बिल भरने का तरीका- UPI और WhatsApp से भी कर सकेंगे पेमेंट

परिजनों ने क्या रखी मांग?

त्रिकला की मौत के बाद पति व परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि अगर उपचार या रेफर करने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है- तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस तक पहुंचा मामला

मामले को लेकर SP देहरा संदीप धवल ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों तथा उपचार के दौरान किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें