#अव्यवस्था
October 7, 2026
हिमाचल में दर्दनाक तस्वीर : सड़क बंद, मां की देह लेकर 6 KM चला बेटा; डंडे से बांधकर पहुंचाया घर
मानसून की शुरुआत से बंद पड़ी है सड़क
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी कई गांवों की सड़कें बंद पड़ी हैं। सिरमौर जिले में सड़क बंद होने का खामियाजा एक परिवार को उस वक्त भुगतना पड़ा, जब 80 वर्षीय महिला की मौत के बाद उसके शव को गांव तक पहुंचाने के लिए डंडे से बांधकर ले जाना पड़ा। ग्रामीणों के साथ परिवार ने करीब छह किलोमीटर का मुश्किल सफर तय किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला नाहन उपमंडल के धारटीधार क्षेत्र की घगेड़ा पंचायत के टीना गुलरवाला गांव का है। यहां रहने वाली 80 वर्षीय परमा देवी लंबे समय से बीमार थीं। शनिवार रात उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें नाहन से चंडीगढ़ के PGI रेफर किया गया। रविवार सुबह करीब चार बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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परमा देवी की मौत के बाद शव को चंडीगढ़ से वाहन के जरिए धारटीधार और रामा घगेड़ा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क तक लाया गया। यहां तक तो शव वाहन से पहुंच गया, लेकिन इसके आगे टीना गुलरवाला जाने वाली सड़क बंद थी।
सड़क बंद होने के कारण ग्रामीणों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई। गांव तक पहुंचने का कोई दूसरा आसान रास्ता नहीं था। ऐसे में ग्रामीणों ने शव को एक डंडे से बांधा और कंधों पर उठाकर ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्ते से करीब छह किलोमीटर तक पैदल ले गए। इसके बाद शव को गांव के श्मशान घाट तक पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।
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ग्रामीणों ने मंगलवार को बताया कि टीना गुलरवाला जाने वाली सड़क मॉनसून की शुरुआत से ही खराब है और बंद पड़ी है। उनका कहना है कि सड़क बंद होने से गांव के लोगों को लंबे समय से परेशानी उठानी पड़ रही है। अब बुजुर्ग महिला का शव कंधे पर उठाकर ले जाने की घटना ने इस समस्या को और सामने ला दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, टीना गुलरवाला सड़क करीब आठ किलोमीटर लंबी है। इसका निर्माण साल 2014 में हुआ था। उस समय नाहन के तत्कालीन विधायक राजीव बिंदल ने सड़क का उद्घाटन किया था। यह सड़क आगे जलमूसा और कोलर के पास कटासन मंदिर से होते हुए पांवटा साहिब-कालाअंब राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ती है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बंद होने के कारण रोजमर्रा के कामों के लिए भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना हो या गांव में किसी जरूरी सामान को पहुंचाना हो, हर काम मुश्किल हो गया है। अब शव को छह किलोमीटर तक कंधे पर ले जाने की घटना ने सड़क खोलने की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने 30 जून को दस्तक दी थी और तीन अक्टूबर को इसकी विदाई हो गई। इस बार प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है। इसके बावजूद कई सड़कें अभी भी बंद हैं। सिरमौर की यह घटना बताती है कि सड़कें बंद रहने से पहाड़ी इलाकों में लोगों को कितनी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।