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November 7, 2026
पटवारी भर्ती परीक्षा हो या पुलिस का ग्राउंड टेस्ट सब एक ही दिन

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी हासिल करने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों बेरोजगार युवाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सालों की मेहनत, दिन-रात की पढ़ाई और भविष्य को संवारने की उम्मीद के बीच अब उनके सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी हो गई है, जिसका सामना करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। प्रदेश में चार बड़ी भर्ती परीक्षाओं की तारीख एक ही दिन निर्धारित कर दी गई है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने एक साथ कई भर्तियों के लिए आवेदन किया था, उन्हें अब अपने ही हाथों से किसी एक अवसर को छोड़ने की नौबत आ सकती है।
आगामी 29 नवंबर की तारीख हजारों युवाओं के लिए बड़ी परेशानी बनकर सामने आई है। इस दिन हिमाचल प्रदेश पुलिस भर्ती का ग्राउंड टेस्ट, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET), पटवारी भर्ती परीक्षा और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की परीक्षा आयोजित होनी निर्धारित है। चारों महत्वपूर्ण भर्तियों की प्रक्रिया एक ही दिन होने से अभ्यर्थियों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे किस परीक्षा में शामिल हों और किस अवसर को छोड़ने का जोखिम उठाएं।
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प्रदेश में सरकारी नौकरी के सीमित अवसरों और प्रतियोगिता के लगातार बढ़ते स्तर को देखते हुए युवा किसी एक भर्ती पर निर्भर नहीं रहते। अपनी शैक्षणिक योग्यता और पात्रता के अनुसार वे पुलिस, शिक्षा, राजस्व विभाग और न्यायिक संस्थानों सहित अलग-अलग विभागों की भर्तियों के लिए आवेदन करते हैं। इसके लिए वे अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं, ताकि नौकरी पाने की संभावना बढ़ाई जा सके। लेकिन जब चार बड़ी परीक्षाएं एक ही तारीख पर आकर खड़ी हो गई हैं तो उनकी यह रणनीति ही उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है।
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक परीक्षा में शामिल होने का फैसला लेने पर उन्हें दूसरी भर्ती का अवसर गंवाना पड़ सकता है। खासकर उन युवाओं के लिए स्थिति ज्यादा मुश्किल है, जिन्होंने कई महीनों तक अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मेहनत की है और सभी के लिए आवेदन शुल्क भी जमा करवाया है। अब तारीखों के टकराव के कारण उन्हें अपनी पसंद या प्राथमिकता के आधार पर किसी एक परीक्षा को चुनना पड़ सकता है। युवाओं का कहना है कि यह केवल परीक्षा की तारीखों का मामला नहीं, बल्कि उनके भविष्य और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ा सवाल है।
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इस पूरे मामले ने प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन और उनके शैड्यूल को लेकर आपसी समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का मानना है कि अलग-अलग विभागों और भर्ती एजैंसियों को परीक्षा तिथियां घोषित करने से पहले एक-दूसरे के कार्यक्रमों की जानकारी लेकर समन्वय स्थापित करना चाहिए। यदि पहले से तय परीक्षाओं को ध्यान में रखकर शैड्यूल बनाया जाता तो हजारों युवाओं को इस परेशानी से बचाया जा सकता था।
परीक्षाओं की तारीखों में टकराव से परेशान अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार, संबंधित विभागों और भर्ती एजैंसियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका आग्रह है कि कम से कम एक या दो परीक्षाओं की तारीख आगे-पीछे कर दी जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को अपनी योग्यता के अनुसार अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने का अवसर मिल सके। युवाओं का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी पहले ही कड़ी प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता से गुजर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा तिथियों का आपस में टकराना उनकी परेशानियों को और बढ़ा रहा है।
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फिलहाल 29 नवंबर को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस बना हुआ है। हजारों युवा उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार और संबंधित भर्ती एजैंसियां उनकी समस्या को गंभीरता से समझेंगी और परीक्षाओं के कार्यक्रम में आवश्यक बदलाव करेंगी। सवाल यह है कि क्या युवाओं को चार में से किसी एक अवसर को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा या फिर प्रशासनिक स्तर पर तालमेल बनाकर उन्हें सभी परीक्षाओं में शामिल होने का रास्ता दिया जाएगा? अब देखना होगा कि बेरोजगार युवाओं की इस मांग पर सरकार और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।