सिरमौर। कहते हैं कि जो ठान लेते हैं कुछ कर दिखाने की, वही इतिहास रच जाते हैं। सपने जब बड़े हों और रास्ता कठिन हो तब दोस्ती अगर सच्ची हो, तो हर मुश्किल आसान लगने लगती है।
जब दोस्ती बनी ताकत...
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के दो युवाओं ने ये साबित कर दिखाया है कि अगर कोई कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने वाला हो, तो संघर्ष भी ताकत में बदल जाता है। युवाओं की यह कहानी महज एक परीक्षा में सफलता की नहीं, बल्कि दोस्ती, धैर्य और अटूट विश्वास की ऐसी मिसाल है, जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है।
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SSC में मोहन का चयन
सैनधार क्षेत्र के चकनाल गांव के निवासी मोहन लाल, पुत्र पूर्ण चंद, तहसील ददाहू ने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित कांस्टेबल (GD) परीक्षा 2025 में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया।
ऑल इंडिया रैंक 619 किया हासिल
मोहन लाल का चयन गृह मंत्रालय के अंतर्गत हुआ है और उन्होंने इस कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 619 प्राप्त की है। खास बात यह रही कि वे पूरे हिमाचल प्रदेश में प्रथम रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी बने, जिससे न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई।
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संघर्षों से भरी रही पढ़ाई की राह
मोहन लाल की शैक्षणिक यात्रा आसान नहीं रही। उन्होंने पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई अपने गांव में ही की, जहां सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बाद नौवीं से बारहवीं तक की शिक्षा उन्होंने बेचड का बाग से पूरी की।
बेटे के सपनों पर नहीं पड़ने दिया बोझ
गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में प्रदेश टॉपर बनना उनके लिए लंबा और कठिन सफर रहा। उनके पिता पूर्ण चंद और माता संजमें देवी ने आर्थिक सीमाओं के बावजूद बेटे के सपनों को कभी बोझ नहीं समझा। खेत-खलिहान और साधारण जीवन के बीच उन्होंने अपने बेटे को हर संभव सहयोग दिया। माता-पिता का यही विश्वास मोहन लाल की सबसे बड़ी पूंजी बन गया।
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दो दोस्तों की साझा मेहनत
मोहन लाल की सफलता की यह कहानी अकेले संघर्ष की नहीं, बल्कि दो दोस्तों की साझा मेहनत और अटूट दोस्ती की कहानी है। मोहन लाल के साथ तैयारी कर रहे उनके करीबी मित्र सचिन पंवार- जो कि राजलग (ठाकुर द्वारा) के रहने वाले हैं- उनका भी इसी परीक्षा में सफलता हासिल की और उनका चयन (CISF) में हुआ है।
CISF में सचिन का चयन
वर्ष 2023 से 2025 तक दोनों दोस्तों ने एक साथ रहकर तैयारी की। नोट्स साझा करना, मॉक टेस्ट देना, एक-दूसरे की गलतियों को सुधारना और असफलता के क्षणों में हौसला बढ़ाना- यह सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। जब कभी आत्मविश्वास कमजोर पड़ता, तब दोस्ती ने उन्हें फिर से खड़ा कर दिया।
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सीमित साधन, लेकिन असीम हौसला
दोनों युवाओं ने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। घर पर रहकर, सीमित संसाधनों में, मोबाइल और ऑनलाइन माध्यमों से ही अपनी तैयारी जारी रखी। कई बार परीक्षा में अपेक्षित परिणाम नहीं आए, निराशा भी हुई, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी रणनीति बदली और निरंतर अभ्यास पर भरोसा बनाए रखा।
इरादे मजबूत हो तो कुछ मुश्किल नहीं
मोहन लाल और सचिन का मानना है कि नियमित अध्ययन, आत्म अनुशासन, धैर्य और सही दिशा ही किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की असली कुंजी है। वे कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी रास्ता नहीं रोक सकती।
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युवाओं के लिए प्रेरणा
आज जब ग्रामीण क्षेत्रों के कई युवा संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं, ऐसे में मोहन लाल और सचिन पंवार की यह कहानी साबित करती है कि मेहनत और सच्ची दोस्ती मिल जाए, तो असंभव भी संभव हो सकता है। सिरमौर की यह प्रेरक गाथा आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती है कि सपने अकेले नहीं, साथ मिलकर देखे जाएं तो उनकी उड़ान और भी ऊंची हो जाती है।
