हमरीपुर। जिनके इरादे ना हों कमजोर, वही लिखते हैं अपनी किस्मत की पंक्तियां खुद, संघर्ष चाहे जितना हो गहरा, एक दिन मेहनत देती है सबसे ऊंची उड़ान की शुभ। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हिमाचल के हमीरपुर जिले के एक साधारण से घर में रहने वाली सायना ने वो कर दिखाया है, जो हर संघर्षरत परिवार की उम्मीद बन सकता है।
5वां स्थान किया हासिल
स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा में कला संकाय में 472 अंक लेकर सायना ने प्रदेश भर में दसवां और जिले में पांचवां स्थान हासिल किया है। ये कामयाबी किसी आसान सफर की नहीं, बल्कि ढेर सारी चुनौतियों और त्याग की कहानी है।
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पिता कैंसर से पीड़ित
सायना के पिता अश्वनी कुमार पिछले चार सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं। बीमारी की शुरुआत में वह ट्रक चलाते थे, लेकिन तबीयत बिगड़ने के बाद नौकरी छोड़नी पड़ी। लंबे इलाज और दर्द भरे दिनों के बाद जब थोड़ी राहत मिली, तो उन्होंने कर्ज लेकर एक ऑटो खरीदा ताकि परिवार का गुजारा किसी तरह चल सके। घर की जिम्मेदारी में मां कंचन देवी लगातार मजबूती से साथ रहीं।
बेहद कठिन समय देखा
सायना के लिए यह समय बेहद कठिन रहा। घर की आर्थिक स्थिति डगमगाई हुई थी, पिता का इलाज चलता रहा, और बड़े सपनों को पालना दिन-ब-दिन मुश्किल होता गया। इन हालातों में, परिवार के रिश्तेदारों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया। खासकर सायना के मामा सुरेंद्र भट्टी, जिन्होंने कहा था कि अगर वह 90% से अधिक अंक लाएगी, तो वे आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएंगे। सायना ने यह लक्ष्य भी पूरा कर दिखाया।
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ठान लिया-नहीं हटेगी पीछे
घर में उसकी बड़ी बहन को अपने सपनों से समझौता करना पड़ा था-पढ़ाई छोड़नी पड़ी, क्योंकि हालात ने ज्यादा इजाजत नहीं दी। मगर सायना ने ठान लिया था कि वह पीछे नहीं हटेगी। उसने एक-एक पल संघर्ष किया और अब उसकी मेहनत रंग लाई है। सायना ने स्कूल के साथ-साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रखी और अपने माता-पिता की मेहनत को कामयाबी में बदलने का संकल्प लिया।
IPS अधिकारी बनना चाहती है सायना
सायना का सपना है कि वह एक दिन IPS अधिकारी बने। उसकी सोच साफ है- वो देश की सेवा करना चाहती है और उन लोगों की आवाज बनना चाहती है, जिनकी तकलीफें अक्सर अनसुनी रह जाती हैं।
