संगड़ाह (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा सोमवार को घोषित किए गए 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में इस बार बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। प्रदेशभर में कई छात्राओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद टॉप मेरिट में जगह बनाकर यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए सुविधाएं नहीं, बल्कि मेहनत और लगन मायने रखती है।

 

इन्हीं होनहार बेटियों में से एक हैं उपमंडल संगड़ाह के गांव कुफ्फर कायरा की रूचि ठाकुर, जिन्होंने आर्ट्स संकाय में 489 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को गर्व का अवसर दिया है।

किसान परिवार की बेटी ने किया कमाल

संगड़ाह क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लाना पालर की छात्रा रूचि एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। आर्थिक संसाधन सीमित होने के बावजूद रूचि ने कभी अपने लक्ष्य को कमजोर नहीं होने दिया।

 

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6-7 घंटे की नियमित पढ़ाई 

रूचि बताती हैं कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र नियमित पढ़ाई और आत्मअनुशासन रहा। वह रोजाना 6 से 7 घंटे तक पढ़ाई करती थीं और स्कूल के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर भी विशेष ध्यान देती थीं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।

गांव से मेरिट तक—बेटियों की उड़ान

रूचि की इस सफलता ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी किसी से पीछे नहीं हैं। प्रदेश के कई दूरदराज इलाकों से इस बार छात्राओं ने टॉप लिस्ट में जगह बनाकर एक नई मिसाल पेश की है। स्कूल में इस उपलब्धि पर जश्न का माहौल रहा, जहां शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। वहीं गांव में भी रूचि की कामयाबी को लेकर उत्साह देखने को मिला और लोगों ने उन्हें बधाई दी।

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प्रशासनिक अधिकारी बनना है लक्ष्य

रूचि का सपना भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज सेवा करना है। उनका कहना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल की जा सकती है। हिमाचल बोर्ड के इस साल के परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े मुकाम हासिल कर रही हैं।

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