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April 28, 2026

हिमाचल के बेटे को बड़ी जिम्मेदारी, एयर वाइस मार्शल बने भूपेंद्र सिंह कंवर- 34 वर्षों से कर रहे देश सेवा

हिमाचल के लाल ने बढ़ाया देश का मान

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Himachal Pradesh news

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के छोटे से गांव ढोह से निकले भूपेंद्र सिंह कंवर ने भारतीय वायुसेना में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक नया मुकाम छू लिया है। उन्हें पदोन्नत कर एयर वाइस मार्शल बना दिया गया है, जो किसी भी अधिकारी के करियर में बेहद प्रतिष्ठित पद माना जाता है। उनकी इस सफलता से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा हमीरपुर और  प्रदेश गर्व महसूस कर रहा है।

एयर कमोडोर और एयर वाइस मार्शल बनने वाले पहले अधिकारी 

भूपेंद्र सिंह कंवर की खास बात यह है कि वे सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा से एयर कमोडोर और फिर एयर वाइस मार्शल बनने वाले पहले अधिकारी हैं। यह उपलब्धि उनके लंबे अनुभव, मेहनत और समर्पण का नतीजा है। 13 अप्रैल 2026 को उन्होंने असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (कार्मिक और नागरिक) के रूप में नई जिम्मेदारी भी संभाल ली है, जो वायुसेना के अहम पदों में से एक माना जाता है।

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साधारण शुरुआत से ऊंचे मुकाम तक का सफर

उनका सफर एक साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर देश की रक्षा से जुड़े शीर्ष पद तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कंज्याण और जिला ऊना से पूरी की। इसके बाद वर्ष 1981 में सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा में दाखिला लिया, जहां से उनके अनुशासन और नेतृत्व की नींव मजबूत हुई।

NDA से वायुसेना तक का सफर

आगे बढ़ते हुए वर्ष 1987 में उन्होंने 78वें कोर्स के तहत नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में प्रवेश लिया, जो देश के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। यहां से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद दिसंबर 1991 में उन्हें भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग नेविगेशन शाखा में कमीशन मिला।

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34 साल का अनुभव, 4000 घंटे की उड़ान

अपने करीब 34 साल के लंबे करियर में भूपेंद्र सिंह कंवर ने देश के विभिन्न हिस्सों में सेवा देते हुए व्यापक अनुभव हासिल किया है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों और मिशनों में हिस्सा लिया और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। एविएशन क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एचएस-748 एव्रो, एएन-32 और आईएल-76 जैसे बड़े और जटिल विमानों पर 4000 घंटे से अधिक उड़ान भरी है।

कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारियां

करियर के दौरान उन्हें कई अहम पदों पर काम करने का मौका मिला। वे एयरक्रू एग्जामिनिंग बोर्ड में देश के सबसे युवा परीक्षकों में शामिल रहे, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। महज 13 साल की सेवा के भीतर ही उनका चयन वायु कर्मचारी निरीक्षण निदेशालय में एक युवा निरीक्षक के रूप में हो गया था, जो उनकी काबिलियत को दर्शाता है।

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ट्रेनिंग और लीडरशिप में बड़ा रोल

इसके अलावा उन्होंने चीफ नेविगेशन इंस्ट्रक्टर और नेविगेशन ट्रेनिंग स्कूल के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने नए अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को मार्गदर्शन दिया और वायुसेना की ट्रेनिंग प्रणाली को मजबूत बनाने में योगदान दिया। बाद में उन्होंने एयर फोर्स रिकॉर्ड्स ऑफिस का नेतृत्व संभाला, जहां एयरमेन और नॉन-कॉम्बैटेंट कर्मियों के मानव संसाधन प्रबंधन में उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा। 

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