#उपलब्धि
April 2, 2026
हिमाचल : 11 साल की दिन-रात मेहनत, भारतीय सेना में सब लेफ्टिनेंट बने अंकुश- परिवार भावुक
अंकुश को कई बार मिली असफलता, लेकिन नहीं मानी हार
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के कई लाल भारतीय सेना में उच्च पदों पर विराजमान हैं। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले के झंडूता उपमंडल के बेटे अंकुश कपिल ने भी ये साबिक कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल दूर नहीं रहती।
झंडूता के छोटे से गांव अमरोआ से निकले अंकुश कपिल की करीब 11 वर्षों की कड़ी मेहनत रंग लाई है। अंकुश ने भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन हासिल किया है। अंकुश ने ये सफलता पाकर ना सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
अंकुश की यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों की तपस्या छिपी है। शुरू से ही उनके मन में देश सेवा का जज्बा था। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े अंकुश ने कभी अपने हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। अपने करियर के शुरुआती दौर में ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे एक दिन अधिकारी बनकर देश की सेवा करेंगे।
इसके लिए उन्होंने लगातार मेहनत की और SSB जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया। कई बार अंकुश को असफलताओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफलता से सीख लेकर वे और मजबूत होकर आगे बढ़ते रहे।

SSB की कठिन प्रक्रिया को पार करना किसी भी उम्मीदवार के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। मगर अंकुश ने इसे भी अपने संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर हासिल कर लिया। इसके बाद उन्होंने नौसेना की कठोर ट्रेनिंग को भी सफलतापूर्वक पूरा किया- जहां अनुशासन, सहनशक्ति और नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा होती है।
परिवार की बात करें तो अंकुश हमेशा से अपने घर का मजबूत स्तंभ रहे हैं। बड़े भाई होने के नाते उन्होंने जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने न सिर्फ अपने सपनों को साकार किया, बल्कि पूरे परिवार को हमेशा प्रेरित और प्रोत्साहित भी किया। कठिन समय में उन्होंने कभी पीछे हटने का नाम नहीं लिया।

अंकुश का भारतीय नौसेना के अधिकारी के रूप चयन उनके परिवार के लिए भावुक और गर्व से भरा हुआ है। वहीं, अंकुश भी अपनी सफलता को लेकर बेहद भावुक और खुश हैं। वहीं गांव में भी खुशी का माहौल है और लोग इस सफलता को अपनी उपलब्धि मान रहे हैं।
परिवार ने इस मौके पर कहा कि यह केवल मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की प्रार्थनाओं, विश्वास और त्याग का फल है। उन्होंने बताया कि अंकुश ने हर कदम पर अनुशासन और समर्पण को प्राथमिकता दी, जो आज उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बना।

अंकुश कपिल की कहानी आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। यह दिखाती है कि बड़े सपने देखने के साथ-साथ उन्हें पूरा करने के लिए धैर्य, मेहनत और निरंतर प्रयास भी जरूरी है।
अंकुश के परिवार ने कहा कि दुनिया अंकुश की वर्दी पर लगे सितारों को देखेगी। मगर उन सितारों तक पहुंचने की कठिन राह, त्याग और संघर्ष को सिर्फ उनका परिवार ही पूरी तरह समझ सकता है।