नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज अपनी मेहनत, लगन और हौसले के दम पर उन ऊंचाइयों को छू रही हैं, जहां कभी पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था। शिक्षा, खेल, प्रशासन और अब सेना हर क्षेत्र में बेटियां अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं। इसी कड़ी में कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां की 23 वर्षीय प्रकृति सूद ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर एक नई मिसाल कायम की है। प्रकृति सूद ने सेना में स्थायी कमीशन प्राप्त कर यह मुकाम हासिल किया।

कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम

प्रकृति सूद ने अपनी इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन के कई चरणों को पार किया। उन्होंने बेंगलुरु स्थित सैन्य नर्सिंग सेवा संस्थान से चार वर्षों का कठोर प्रशिक्षण पूरा किया और पासिंग आउट परेड के बाद आधिकारिक रूप से सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हो गईं। उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

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बदलती सोच की मिसाल बन रहीं बेटियां

हिमाचल की बेटियां अब हर उस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, जिसे कभी पुरुष प्रधान माना जाता था। प्रकृति सूद की सफलता इसी बदलाव की एक मजबूत तस्वीर पेश करती है। आज प्रदेश की युवतियां न केवल सपने देख रही हैं, बल्कि उन्हें पूरा भी कर रही हैं।

शिक्षा और खेल से जुड़ा प्रतिभाशाली परिवार

प्रकृति एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां शिक्षा और प्रतिभा दोनों का मजबूत आधार है। उनके पिता शिक्षक हैं और माता भी शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वहीं उनके छोटे भाई ने खेलों में प्रदेश का नाम रोशन किया है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। यह परिवार आज युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

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युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

प्रकृति सूद की यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे हिमाचल के युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मुकाम दूर नहीं। देवभूमि हिमाचल की बेटियां अब हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं और यह बदलते समाज की एक सकारात्मक तस्वीर भी पेश कर रहा है।