सोलन। कहते है कि मेहनत का फल एक न एक दिन जरूर मिलता है। और हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में फल विक्रेता की बेटी को भी मेहनत का फल मिला है। सोलन के पुराना बस स्टैंड पर रोजाना फल बेचते एक पिता की जिंदगी में उस वक्त खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब बेटी की मेहनत का नतीजा सामने आया।

 

घर की जिम्मेदारियों के बीच पिता अपना काम करते रहे और बेटी अपने सपने के लिए पढ़ाई में जुटी रही। अब इस बेटी ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी चर्चा पूरे सोलन में हो रही है।

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पिता लगाते हैं फल की रेहड़ी

कनिका शर्मा के पिता राकेश शर्मा सोलन के पुराना बस स्टैंड पर फल की रेहड़ी लगाते हैं। परिवार की आमदनी का बड़ा सहारा यही काम है। सीमित संसाधनों के बावजूद राकेश ने बेटी की पढ़ाई जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

हमीरपुर से की 12वीं तक पढ़ाई

कनिका ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला झगड़ियानी, हमीरपुर से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसने मेडिकल क्षेत्र में जाने का लक्ष्य तय करते हुए NEET की तैयारी शुरू की।

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मेहनत रंग लाई, NEET में मिली कामयाबी

लगातार तैयारी के बाद कनिका ने NEET परीक्षा क्रैक कर ली। उसकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ परिवार बल्कि सोलन के पुराना बस स्टैंड से जुड़े व्यापारियों और स्थानीय लोगों को भी खुशी का मौका दिया है।

बेटी की खुशी में पिता की रेहड़ी पर पहुंचा बाजार

कनिका की सफलता की जानकारी मिलने के बाद सोलन के समाजसेवी और व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष मुकेश गुप्ता अन्य व्यापारियों के साथ राकेश शर्मा की रेहड़ी पर पहुंचे। उन्होंने राकेश शर्मा का मुंह मीठा करवाकर बेटी की कामयाबी पर बधाई दी।

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रेहड़ी से ही खरीदे फल, लोगों में बांटी खुशी

मुकेश गुप्ता ने राकेश शर्मा की रेहड़ी से फल खरीदे और वहां मौजूद लोगों व व्यापारियों में बांट दिए। इस दौरान कनिका की सफलता को लेकर खुशी का माहौल रहा। कनिका की कामयाबी ने यह भी दिखाया कि सपने बड़े हों तो उन्हें पूरा करने के लिए संसाधनों से ज्यादा मेहनत और हौसले की जरूरत होती है।

बेटी ने रचा इतिहास

एक तरफ पिता रोज फल की रेहड़ी लगाकर परिवार संभालते रहे, तो दूसरी ओर बेटी पढ़ाई में जुटी रही। अब दोनों की मेहनत का नतीजा NEET की सफलता के रूप में सामने आया है।

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