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September 7, 2026
हिमाचल की बेटी ने रचा इतिहास: कोरोना काल में शुरू किया ऐसा अनोखा काम; मिला नेशन बिल्डर अवॉर्ड
कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों की बनीं सहारा
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बरोट, मंडी। कहते हैं कि एक शिक्षक सिर्फ बच्चों को किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उनके सपनों को उड़ान देने का काम भी करता है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की शिक्षिका निशा ठाकुर ने इसी सोच को अपनी जिंदगी का उद्देश्य बना लिया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और सामाजिक सरोकारों के लिए उन्हें अब प्रतिष्ठित नेशन बिल्डर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान रोटरी क्लब छोटी काशी की ओर से उन्हें प्रदान किया गया।
जब कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों के दरवाजे बंद हो गए थे और बच्चों की पढ़ाई पर सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया था, उस समय निशा ठाकुर ने हार नहीं मानी। उन्होंने तकनीक को शिक्षा का माध्यम बनाया और यू-ट्यूब चैनल के जरिए हिंदी की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की। उनके इस प्रयास का लाभ सिर्फ उनके स्कूल के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दूसरे स्कूलों के बच्चे भी इससे जुड़कर पढ़ाई करते रहे। उनके इस अभिनव प्रयास की उस समय के शिक्षा मंत्री ने भी सराहना की थी।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पशाकोट बरोट में हिंदी प्रवक्ता के रूप में सेवाएं दे रही निशा ठाकुर को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए रोटरी क्लब छोटी काशी ने नेशन बिल्डर अवॉर्ड से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान रोटरी क्लब छोटी काशी के प्रधान अखिलेश भारती, चार्टर प्रेसिडेंट मुनीश सूद और पूर्व प्रधान प्रोफेसर अनुपमा सिंह ने प्रदान किया।
सम्मान मिलने के बाद निशा ठाकुर ने इसका श्रेय खुद लेने के बजाय अपने विद्यार्थियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन सभी बच्चों की वजह से संभव हुई, जिनके साथ काम करने और उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर उन्हें मिला। उन्होंने अपने गुरुजनों, प्रधानाचार्यों और सहकर्मियों के साथ-साथ अपने पति डॉ. दीपक ठाकुर का भी आभार जताया, जो हर कदम पर उन्हें प्रोत्साहित करते रहे हैं।
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निशा ठाकुर वर्ष 2014 से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पशाकोट बरोट में हिंदी प्रवक्ता के तौर पर कार्यरत हैं। वह मंडी जिले के बड़सू गांव की निवासी हैं। करीब एक दशक से अधिक समय से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय निशा ने अध्यापन को केवल नौकरी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया।
शिक्षा के साथ-साथ निशा ठाकुर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी लगातार काम कर रही हैं। वह युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाती हैं। उनका प्रयास है कि बच्चे शिक्षा के साथ-साथ स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण में आगे बढ़ें।
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निशा ठाकुर की पहल का एक मानवीय पक्ष यह भी है कि वह जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए व्यक्तिगत स्तर पर आगे आती हैं। विशेष रूप से ऐसे बच्चे जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है, उनकी फीस, कपड़े और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध करवाने में वह सहयोग करती हैं।
उनके समर्पण की एक मिसाल कुछ माह पहले देखने को मिली। निशा ठाकुर को रास्ते में एक गरीब परिवार की बेटी रीता देवी मिली, जिसने करीब तीन साल पहले स्कूल छोड़ दिया था। निशा ने बच्ची की स्थिति को समझते हुए उसे दोबारा शिक्षा से जोड़ने का फैसला किया। उन्होंने हरसंभव मदद की और रीता को फिर से विद्यालय पहुंचाया। आज रीता नियमित रूप से पढ़ाई कर रही है। एक बच्ची का दोबारा स्कूल पहुंचना भले ही छोटा कदम नजर आए, लेकिन उसके भविष्य के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
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नेशन बिल्डर अवॉर्ड मिलने के बाद निशा ठाकुर ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए आगे और बेहतर काम करने की प्रेरणा है। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने विद्यार्थियों और उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके प्रयासों में साथ दिया।
निशा ठाकुर की कहानी इस बात की मिसाल है कि एक शिक्षक चाहे तो अपनी कक्षा से निकलकर समाज में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। कोरोना जैसी चुनौती के बीच ऑनलाइन शिक्षा की शुरुआत करना हो या स्कूल छोड़ चुकी बच्ची को दोबारा पढ़ाई से जोड़ना, उनके प्रयासों ने यह साबित किया है कि एक छोटी सी पहल किसी बच्चे के पूरे भविष्य की दिशा बदल सकती है।