कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की बेटियां हर क्षेत्र में बेटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इसी कड़ी में अब कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र की एक बेटी ने अपने पिता की शहादत को प्रेरणा बनाकर भारतीय सेना की वर्दी पहनने का सपना पूरा किया है।
शहीद की बेटी बनी लेफ्टिनेंट
कंडबाड़ी गांव की आभा ने कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प के दम पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके व हिमाचल के लिए गर्व की बात है।
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आतंकी मुठभेड़ में पिता हुए शहीद
आभा की जिंदगी की कहानी संघर्ष और प्रेरणा से भरी हुई है। अप्रैल 2003 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग क्षेत्र में आतंकियों के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान उनके पिता नायक जीत सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
बचपन में खो दिया पिता का साया
उस समय आभा की उम्र मात्र ढाई वर्ष थी। इतनी छोटी उम्र में उन्हें शायद यह समझ भी नहीं था कि तिरंगे में लिपटकर घर आए उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। बचपन में ही पिता को खो चुकी आभा ने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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पिता को मरणोपरांत मिला सेना मेडल
नायक जीत सिंह ने भारतीय सेना की महार रेजिमेंट में रहकर देश की सेवा की थी। आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान दिखाई गई बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया गया। परिवार के लोगों और गांव के बुजुर्गों से जब-जब आभा ने अपने पिता की बहादुरी की कहानी सुनी, तब-तब उनके मन में भी देश सेवा का जज्बा और मजबूत होता गया।
जिद बनी जीवन का लक्ष्य
जैसे-जैसे आभा बड़ी होती गईं, उन्हें अपने पिता की शहादत का असली अर्थ समझ आने लगा। उसी समय उन्होंने मन ही मन यह ठान लिया कि वह भी सेना में जाकर देश की सेवा करेंगी। परिवार ने भी उनके इस संकल्प को पूरा समर्थन दिया। हालांकि यह रास्ता आसान नहीं था, लेकिन आभा ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
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पढ़ाई में भी रहीं अव्वल
आभा ने अपनी शुरुआती शिक्षा पालमपुर के बनूरी स्थित क्रेसेंट पब्लिक स्कूल से पूरी की। वह पढ़ाई में भी काफी तेज थीं और स्कूल के दिनों से ही अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के लिए जानी जाती थीं। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने NIT हमीरपुर में दाखिला लिया और इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की।
इंजीनियरिंग स्टूडेंट रह चुकी हैं आभा
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान भी उनके मन में सेना में जाने का सपना लगातार जिंदा रहा। इसी उद्देश्य से उन्होंने कॉलेज में NCC जॉइन की। NCC के प्रशिक्षण ने उनके व्यक्तित्व को और निखारा और उन्हें सैन्य जीवन की ओर बढ़ने के लिए तैयार किया। हमीरपुर की NCC यूनिट में उन्होंने सीनियर अंडर ऑफिसर के रूप में जिम्मेदारी निभाई और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
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कॉरपोरेट नौकरी छोड़ चुनी देश सेवा
आभा की प्रतिभा को देखते हुए इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद उन्हें एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट मिला। उन्होंने कुछ समय के लिए बेंगलुरु में नौकरी भी की, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। उनके मन में हमेशा यही भावना रही कि उन्हें अपने पिता की तरह देश की सेवा करनी है।
पिता के नक्शे कदम पर चली बेटी
कॉरपोरेट जीवन की सुविधाओं और सुरक्षित भविष्य को छोड़कर उन्होंने भारतीय सेना में जाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और अंततः NCC टेक के माध्यम से भारतीय सेना में चयनित हो गईं।
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कठिन प्रशिक्षण के बाद मिला कमीशन
सेना में चयन के बाद आभा ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी OTA गया में कठोर सैन्य प्रशिक्षण लिया। महीनों तक चले कठिन शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण के बाद उन्होंने खुद को एक सशक्त सैन्य अधिकारी के रूप में तैयार किया।
बचपन का सपना हुआ साकार
7 मार्च, 2026 को OTA गया में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान आभा को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला। इस ऐतिहासिक पल के साथ ही उनके बचपन का सपना साकार हो गया और परिवार की तीन पीढ़ियों की सैन्य विरासत आगे बढ़ी। आभा के दादा भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं।
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पूरे क्षेत्र के लिए बनी प्रेरणा
आभा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि बेटियां भी देश की सुरक्षा में किसी से कम नहीं हैं। कंडबाड़ी गांव की यह बेटी आज पूरे पालमपुर और हिमाचल प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि आभा की इस उपलब्धि में उनकी मां और पूरे परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।
शहादत की विरासत बनी प्रेरणा
आभा की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस विरासत की कहानी है जो शहादत से जन्म लेती है। उनके पिता ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और उसी बलिदान ने उनकी बेटी को भी देश सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
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आभा को त्रिलोक कपूर ने दी बधाई
आभा की इस सफलता पर पालमपुर विधानसभा बीजेपी प्रत्याशी त्रिलोक कपूर ने भी बधाई दी है। उन्होंने आभी की तस्वीर के साथ एक पोस्ट शेयर की है।
