हमीरपुर। क्या खूब लिखा है किसी ने कि, मेहनत की राह पर चलता है वही, जो सितारों को भी छू लेता है। कभी जुनून और हौंसले का संगम जब हो जाए, तो सफलता कदम चूमने चली आती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हमीरपुर जिले के लाल शिवम कानूनगो ने।

देशभर में पाया दूसरा रैंक किया

हमीरपुर जिले के भोरंज क्षेत्र से एक बार फिर प्रतिभा का अद्भुत उदाहरण सामने आया है। यहाँ के होनहार छात्र शिवम कानूनगो ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा JRF/SRF 2025 में ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

यह भी पढ़ें : HC के फैसले से पिता नाखुश- बोले, 11 साल बाद भी नहीं मिला मेरे बच्चे को इंसाफ

इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और गांव बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है।

IARI नई दिल्ली में करेंगे डॉक्टरेट की पढ़ाई

शिवम की इस सफलता ने उनके सामने देश के सबसे प्रतिष्ठित कृषि अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के दरवाजे खोल दिए हैं। अब वे फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केपिंग विषय में पीएचडी करेंगे।

यह भी पढ़ें : मंत्री विक्रमादित्य सिंह की दुल्हन का होली लॉज में हुआ स्वागत, कल होगा शादी का रिसेप्शन

यह वही संस्थान है जिसे कृषि विज्ञान का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है और जहाँ प्रवेश पाना हर कृषि छात्र का सपना होता है। शिवम ने यह सपना न केवल पूरा किया है बल्कि शीर्ष स्थान पाकर अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए नई प्रेरणा भी जगाई है।

मेधावी शिवम का सफर

शिवम की शिक्षा यात्रा हमेशा से उत्कृष्ट रही है। उन्होंने स्नातक स्तर की पढ़ाई हिमाचल प्रदेश के डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी से संबद्ध कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नेरी (हमीरपुर) से की। इसके बाद उन्होंने अपनी परास्नातक (M.Sc.) डिग्री शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू से फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केपिंग विषय में पूरी की।

सफलता का श्रेय

जैसे ही उनकी इस उपलब्धि की खबर पैतृक गांव और क्षेत्र में पहुंची, खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदार, शिक्षकों और मित्रों ने शिवम की मेहनत और सफलता पर गर्व व्यक्त किया। स्थानीय लोग इस उपलब्धि को भोरंज और पूरे हमीरपुर की नई पहचान मान रहे हैं। अपनी उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवम ने कहा "मेरी सफलता का श्रेय सबसे पहले अपने माता-पिता के आशीर्वाद को देता हूँ।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : ट्रक ने पहले HRTC बस को मारी टक्कर, भागने लगा तो खाई में गिरा; मची चीख-पुकार

इसके साथ ही शिक्षकों का मार्गदर्शन और मेरी निरंतर मेहनत भी इस सफर में अहम रही। मेरा लक्ष्य हमेशा कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सार्थक योगदान देना रहा है। आईएआरआई से पीएचडी करना इस लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है। मैं इस अवसर का पूरा लाभ उठाकर अपने विषय में विशेषज्ञता हासिल करना चाहता हूँ।"

राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान

शिवम की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम की मिसाल है बल्कि यह भी दिखाती है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सक्षम हैं।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें।