शिमला। जब भी कोई व्यक्ति किसी मुसीबत या इमरजेंसी में फंसता है, तो उसे सबसे पहले पुलिस से मदद की उम्मीद होती है। इसी जिम्मेदारी को तेजी से निभाने के मामले में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। सितंबर 2026 की ऑल इंडिया ERSS-112 रिस्पॉन्स टाइम रैंकिंग में हिमाचल पुलिस देश में पहले स्थान पर रही है। पिछले 30 दिनों में प्रदेश में 112 पर मिली इमरजेंसी कॉल पर पुलिस ने औसतन 4 मिनट 4 सेकंड में रिस्पॉन्स दिया।
34वें नंबर से सीधे पहले स्थान तक पहुंचा हिमाचल
खास बात यह है कि नवंबर 2025 तक हिमाचल पुलिस इसी रैंकिंग में देश में 34वें स्थान पर थी। इसके बाद पुलिस ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम में कई सुधार किए। इन सुधारों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है और हिमाचल की रैंकिंग लगातार ऊपर पहुंचती गई। अब प्रदेश देशभर में पहले स्थान पर है।
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112 पर कॉल के बाद ऐसे पहुंचती है मदद
ERSS-112 के तहत जब कोई व्यक्ति इमरजेंसी में 112 नंबर पर कॉल करता है, तो उसकी सूचना पर तुरंत कार्रवाई शुरू की जाती है। कॉल टेकर्स, डिस्पैचर्स, इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल (ERV), जिला पुलिस और फील्ड स्टाफ आपस में तालमेल करके मौके पर मदद पहुंचाते हैं।
तकनीक और बेहतर तालमेल से कम हुआ रिस्पॉन्स टाइम
पुलिस के मुताबिक, रिस्पॉन्स टाइम कम करने के पीछे लगातार मॉनिटरिंग, तकनीक का बेहतर इस्तेमाल और काम में अनुशासन की बड़ी भूमिका रही है। इसके साथ ही राज्य ERSS सेंटर, जिला पुलिस और फील्ड टीमों के बीच बेहतर तालमेल से भी इमरजेंसी कॉल पर कार्रवाई तेजी से हो रही है।
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इमरजेंसी में हर मिनट होता है बेहद जरूरी
हादसा हो, अपराध की घटना हो या किसी को मेडिकल इमरजेंसी हो, ऐसे समय में हर मिनट कीमती होता है। पुलिस की मदद जितनी जल्दी मौके पर पहुंचती है, उतना ही लोगों की जान और सामान की सुरक्षा में मदद मिल सकती है। इसी वजह से ERSS-112 का तेज रिस्पॉन्स सिस्टम लोगों के लिए काफी अहम है।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल पुलिस को दी बधाई
हिमाचल के मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर पुलिस की ERSS-112 टीम को बधाई दी है। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि इमरजेंसी सेवाओं की इसी गति को आगे भी बनाए रखें और आम लोगों को मिलने वाली सुविधा में लगातार सुधार करें।
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नंबर-1 बनना उपलब्धि, इसे बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी
हिमाचल पुलिस का कहना है कि देश में पहला स्थान हासिल करना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसे लगातार बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। पुलिस का फोकस अब इमरजेंसी में लोगों को और तेज और बेहतर मदद पहुंचाने पर है।
