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October 21, 2026
हिमाचल : पति-पत्नी ने रचा इतिहास, एक साथ बने लेफ्टिनेंट कर्नल- बढ़ाया फौजी परिवार का मान
अमित ने एवरेस्ट पर दो बार फहराया तिरंगा
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हमीरपुर। कहते हैं, जब जीवनसाथी का साथ हो तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी आसान हो जाती है। हमीरपुर के जंडल गांव के रहने वाले पति-पत्नी ने इस बात को सच कर दिखाया है। भारतीय सेना में करीब 14 साल तक साथ सेवा देने के बाद मेजर अमित सिंह चौहान और उनकी पत्नी राधिका जग्गी ने एक ही दिन लेफ्टिनेंट कर्नल बनकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों की इस कामयाबी से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और हिमाचल प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है।
लेफ्टिनेंट कर्नल अमित सिंह चौहान और उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल राधिका जग्गी हमीरपुर जिले के टौणी देवी क्षेत्र के जंडल गांव के रहने वाले हैं। अमित के पिता सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर रणजीत सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2012 में दोनों पति-पत्नी ने एक साथ सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन हासिल किया था। अब करीब 14 साल बाद दोनों एक बार फिर एक साथ प्रमोशन पाकर लेफ्टिनेंट कर्नल बने हैं। उन्होंने यह मुकाम अपनी मेहनत, अनुशासन और सेना के प्रति समर्पण के दम पर हासिल किया है।
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अमित सिंह चौहान के पिता सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर रणजीत सिंह चौहान ने बताया कि उनके बेटे और बहू दिसंबर में घर लौटेंगे। दोनों के घर पहुंचने पर स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा और उनकी इस उपलब्धि का जश्न मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैन्य दंपति के एक साथ लेफ्टिनेंट कर्नल बनने की खबर से जंडल गांव समेत पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। दोनों ने अपनी मेहनत से परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है।
सेना में सेवाएं देने के साथ-साथ लेफ्टिनेंट कर्नल अमित सिंह चौहान को पर्वतारोहण का भी शौक है। वह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर दो बार तिरंगा फहरा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा समेत कई मुश्किल पर्वत चोटियों पर भी सफल चढ़ाई की है। उनकी ये उपलब्धियां उनके साहस, हिम्मत और मजबूत इरादों को दिखाती हैं। सेना में प्रमोशन के साथ उनकी पर्वतारोहण की उपलब्धियां भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
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लेफ्टिनेंट कर्नल राधिका जग्गी ने भी सेना में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी यानी OTA में कोच के तौर पर सेवाएं दे चुकी हैं। यहां उन्होंने भावी सैन्य अधिकारियों को ट्रेनिंग देने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वह संयुक्त राष्ट्र के तहत स्टाफ ऑफिसर के तौर पर भी सेवाएं दे चुकी हैं। राधिका इंडियन आर्मी की पिस्तौल निशानेबाजी टीम की सदस्य भी रह चुकी हैं। ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी और निशानेबाजी के क्षेत्र में उनका अनुभव उनकी उपलब्धियों को खास बनाता है।
अमित सिंह चौहान के पिता रणजीत सिंह चौहान ने बेटे और बहू की इस उपलब्धि पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों ने अपनी मेहनत और लगन से परिवार के साथ पूरे इलाके, हमीरपुर और हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया है। एक ही दिन दोनों का लेफ्टिनेंट कर्नल बनना परिवार के लिए बेहद गर्व का पल है। उनकी सफलता यह बताती है कि अगर मेहनत, अनुशासन और अपने काम के प्रति पूरी ईमानदारी हो तो बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।