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November 7, 2026
हिमाचल के रहने वाले हैं रोहित, दादा ने स्थापिता किया था डीएवी कॉलेज

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कई लोग बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं। इनमें से कुछ लोग विदेशी धरती पर अपनी मेहनत, प्रतिभा और काबिलियत के दम पर ऐसी पहचान बना लेते हैं कि उनकी सफलता पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन जाती है। अमेरिका से सामने आई ऐसी ही एक खबर इन दिनों कांगड़ा में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
भारतीय मूल के रोहित खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीतकर एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की है। खास बात यह है कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार को शिकस्त देकर यह जीत हासिल की है। अमेरिका में 'रो खन्ना' के नाम से पहचाने जाने वाले इस नेता की सफलता का कांगड़ा से भी गहरा नाता है।
रोहित खन्ना की सफलता की कहानी जितनी दिलचस्प है, उतनी ही खास उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी है। उनके पूर्वज मूल रूप से जिला कांगड़ा के नूरपुर क्षेत्र से संबंध रखते थे। बाद में परिवार कांगड़ा शहर में आकर बस गया। कांगड़ा के तहसील चौक के समीप आज भी उनके पूर्वजों का पुराना मकान मौजूद है। इतना ही नहीं, परिवार के कई रिश्तेदार आज भी कांगड़ा में रहते हैं। रोहित खन्ना के रिश्तेदार केसी सोनी के अनुसार, अमेरिका में उनकी पहचान और सफलता को लेकर कांगड़ा के लोगों में खास उत्साह है। उनके परिवार का इस क्षेत्र से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है।

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रोहित खन्ना की पारिवारिक विरासत की सबसे खास बात यह है कि उनके परिवार का योगदान केवल विदेशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांगड़ा और देश के इतिहास में भी उनकी अहम भूमिका रही है। उनके दादा स्वर्गीय सीडी खन्ना डीएवी कॉलेज कांगड़ा के संस्थापक थे। यानी जिस शिक्षण संस्थान से आज हजारों विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर चुके हैं, उसकी स्थापना में रोहित खन्ना के परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वहीं, उनके नाना अमरनाथ विद्यालंकार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए थे। देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद करवाने के संघर्ष में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई और इस दौरान करीब चार साल जेल में भी बिताए।
रोहित खन्ना के परिवार का अमेरिका पहुंचने का सफर भी काफी दिलचस्प है। रोहित के पिता विजय खन्ना वर्ष 1968 में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अमेरिका पहुंचे थे। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय में पढ़ाई की। इसके करीब सात साल बाद वर्ष 1975 में उनकी मां ज्योत्सना खन्ना भी अमेरिका चली गईं। बेहतर शिक्षा, अवसरों और भविष्य की तलाश में अमेरिका पहुंचे इस परिवार ने धीरे-धीरे वहीं अपनी पहचान बनाई। इसी परिवार में 13 सितंबर 1976 को अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में रोहित खन्ना का जन्म हुआ।
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रोहित खन्ना ने अपनी शुरुआती शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी शानदार उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद प्रतिष्ठित येल विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी कर जूरिस डॉक्टर की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत की और बाद में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाया। कानून, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीतियों की गहरी समझ ने उनके राजनीतिक सफर को दिशा दी। शिक्षा और पेशेवर अनुभव के बाद उन्होंने अमेरिकी राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे वहां अपनी अलग पहचान बना ली।
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रोहित खन्ना का अमेरिकी राजनीति में सफर वर्ष 2016 में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा, जब उन्होंने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने पहली बार सांसद के रूप में कार्यभार संभाला। तब से वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह बनाए हुए हैं। इस बार भी चुनाव में जीत हासिल कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ और जनसमर्थन का परिचय दिया। उनकी जीत इसलिए भी खास चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार को हराया है, जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी है।
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अमेरिका में किसी भारतीय मूल के नेता की चुनावी सफलता अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन रोहित खन्ना का मामला हिमाचल प्रदेश के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी जड़ें इसी मिट्टी से जुड़ी हैं। नूरपुर से शुरू हुआ परिवार का सफर कांगड़ा शहर तक पहुंचा और फिर बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका में जाकर बस गया। आज उसी परिवार का एक सदस्य दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोकतांत्रिक देशों में से एक की राजनीति में अपनी पहचान बना चुका है। कांगड़ा के लोगों के लिए यह गर्व की बात है कि विदेश में मिली इस बड़ी उपलब्धि के पीछे उनके अपने जिले की पारिवारिक विरासत जुड़ी हुई है।