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October 28, 2026
हिमाचल के चार दोस्तों ने नौकरी छोड़कर खड़ी की अपनी कंपनी, 70 लोगों को दिया रोजगार
नौकरी छोड़ गांव में उद्योग लगाने का आया विचार
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और लोगों को घर के पास ही रोजगार देने के लिए सरकार की योजनाएं काफी मददगार साबित हो रही हैं। इसका एक अच्छा उदाहरण मंडी जिले की चच्योट तहसील के बाढू गांव में देखने को मिला है। यहां हिल थ्रिल एग्रो प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी चार दोस्तों ने मिलकर शुरू की थी। आज इस कंपनी में करीब 70 लोग काम कर रहे हैं।
कंपनी में फलों और सब्जियों से अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इससे एक तरफ किसानों और बागवानों की उपज का सही इस्तेमाल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ गांव के लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक खीरामणी ने बताया कि वह पहले निजी क्षेत्र में नौकरी करते थे। इसी दौरान उन्होंने अपने तीन साथियों भागीरथ चौहान, रविंद्र और इल्मदीन अली के साथ मिलकर गांव में ही अपना उद्योग शुरू करने का विचार बनाया। चारों दोस्तों का मकसद था कि गांव के लोगों को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े और उन्हें अपने घर के आसपास ही काम मिल सके। इसी सोच के साथ हिल थ्रिल एग्रो प्रोसेसर की शुरुआत की गई।
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कंपनी में जनवरी 2023 से व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू हुआ। अब यहां अचार, चटनी, जैम, फ्रूट वाइन, फ्रूट साइडर और एप्पल साइडर विनेगर समेत 50 से ज्यादा तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले फलों और सब्जियों से तैयार किया जाता है। इससे किसानों और बागवानों की उपज को बाजार में बेचने के साथ-साथ उसका मूल्य भी बढ़ रहा है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक खीरामणी ने बताया कि कंपनी के विस्तार के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई थी। इसके बाद इंटीग्रेटेड बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2024 में कंपनी को 84 लाख रुपये की अनुदान राशि मिली।
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उन्होंने कहा कि सरकार से मिली इस आर्थिक मदद से कंपनी के काम को आगे बढ़ाने और उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद मिली है। ऐसी योजनाओं से गांवों में अपना कारोबार शुरू करने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिलता है।

कंपनी में तैयार होने वाले उत्पादों की मांग सिर्फ हिमाचल प्रदेश में ही नहीं है। इनके उत्पाद उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर तक भी पहुंच रहे हैं। दूसरे राज्यों में उत्पादों की सप्लाई शुरू होने से कंपनी का कारोबार बढ़ा है। कंपनी का मकसद स्थानीय फलों और सब्जियों को प्रोसेस कर उन्हें बड़े बाजार तक पहुंचाना है।
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कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रोजगार बढ़ना भी शामिल है। जब कंपनी शुरू हुई थी, तब यहां सिर्फ 24 लोग काम करते थे। अब कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है। इनमें से 40 कर्मचारियों को ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी दी जा रही हैं। कंपनी में काम करने वाले लोगों को अपने हुनर को बेहतर बनाने और काम का अनुभव हासिल करने का मौका भी मिल रहा है।

कंपनी में काम करने वाले कुटाहची निवासी जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि घर के पास नौकरी मिलने से उन्हें काफी सुविधा हुई है। उन्होंने कहा कि यहां काम करते हुए उन्हें अपने हुनर को और बेहतर करने का मौका भी मिल रहा है।
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किलिंग निवासी कमल शर्मा ने बताया कि रोजगार की तलाश में युवाओं को अक्सर अपने घर से दूर जाना पड़ता है। लेकिन हिल थ्रिल में काम मिलने से उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल गया है। उन्होंने कहा कि ईपीएफ और ईएसआईसी जैसी सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा भी मिलती है। उन्होंने इस तरह के प्रयासों के लिए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार जताया।

चच्योट निवासी गुंजन शर्मा ने बताया कि स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से उन्हें काफी फायदा हुआ है। उन्होंने रोजगार का मौका देने के लिए कंपनी प्रबंधन और प्रदेश सरकार का आभार जताया।
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ग्राम पंचायत बाढू की प्रधान सीता ठाकुर ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में इस तरह की प्रसंस्करण इकाई लगना बड़ी उपलब्धि है। इससे लोगों को अपने घर के पास ही काम मिल रहा है और नौकरी के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के उद्योगों को बढ़ावा मिलने से लोगों की आजीविका मजबूत हो रही है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का भी आभार जताया।
हिल थ्रिल एग्रो प्रोसेसर की कहानी बताती है कि अगर स्थानीय संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जाए और सरकार से मदद मिले, तो गांव में ही रोजगार के अच्छे अवसर पैदा किए जा सकते हैं। चार दोस्तों ने मिलकर जिस छोटे से कारोबार की शुरुआत की थी, वह आज 70 लोगों के रोजगार का जरिया बन चुका है। कंपनी स्थानीय फलों और सब्जियों को प्रोसेस कर रही है और अपने उत्पादों को कई राज्यों तक पहुंचा रही है।
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इस कंपनी की सफलता से यह भी पता चलता है कि गांवों में छोटे और मध्यम उद्योग शुरू करके स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। साथ ही किसानों और बागवानों की उपज का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। चार दोस्तों की यह पहल आज रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय कृषि-बागवानी उत्पादों के बेहतर इस्तेमाल की मिसाल बन गई है। इससे दूसरे युवाओं को भी अपने क्षेत्र में ही कारोबार शुरू करने की प्रेरणा मिल सकती है।