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October 20, 2026
हिमाचल के बेटे ने देश के लिए जीता गोल्ड- बना वर्ल्ड चैंपियन, 8 साल की उम्र में गंवाई थी बाजू
हादसे में गंवाया हाथ, लेकिन हौसला नहीं हारा
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ऊना। कहते हैं कि हौसले बुलंद हों, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी इंसान का रास्ता नहीं रोक सकती। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के निषाद कुमार ने अपनी मेहनत और हिम्मत से इस बात को सच कर दिखाया है। बचपन में हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने सपनों को पूरा करने की ठान ली। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और वह देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने लंबी कूद में 7.11 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीत लिया है। उनकी यह कामयाबी सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि हिम्मत, मेहनत और कभी हार न मानने की मिसाल है।
निषाद कुमार का बचपन ऊना जिले के अंब उपमंडल के बदायूं गांव में बीता। जब वह महज आठ साल के थे, तब उनके साथ एक हादसा हो गया। उनकी मां मवेशियों के लिए चारा काट रही थीं और निषाद भी मशीन में चारा डालने में मदद कर रहे थे। इसी दौरान उनका हाथ मशीन की चपेट में आ गया और उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा।
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इतनी कम उम्र में इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद निषाद ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए। जमा दो की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह ट्रेनिंग के लिए पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम पहुंचे। यहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।
निषाद के माता-पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और कभी उन्हें दूसरों से कम महसूस नहीं होने दिया। इसी हिम्मत के साथ निषाद ने अपने एक हाथ की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया और ऊंची कूद में अपना करियर बनाने का फैसला किया। इस खेल में शरीर का संतुलन बनाए रखना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपनी तकनीक पर मेहनत की।
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साल 2017 में उन्होंने पेशेवर पैरा-एथलेटिक्स में कदम रखा। इसके बाद कोच रमेश के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को और बेहतर बनाया। कोरोना महामारी के दौरान अभ्यास छूटने और शरीर कमजोर होने से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी की। उनकी मेहनत का नतीजा रहा कि उन्होंने टोक्यो और पेरिस पैरालिंपिक में ऊंची कूद स्पर्धा में लगातार दो रजत पदक जीते।
निषाद की इस बड़ी उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी मां पुष्पा देवी ने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें निषाद पर गर्व है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि निषाद की खेल उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें सरकारी नौकरी दी जाए। परिवार को उम्मीद है कि निषाद की उपलब्धियों को उचित सम्मान मिलेगा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
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लंबी कूद में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब निषाद कुमार का अगला लक्ष्य ऊंची कूद में शानदार प्रदर्शन करना है। वह 20 अक्टूबर को इस स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऊंची कूद उनकी मुख्य स्पर्धा है और इसमें उनकी मौजूदा एशियाई रैंकिंग नंबर एक बताई गई है।
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ऐसे में सभी की निगाहें उनके अगले मुकाबले पर टिकी हैं। उम्मीद है कि निषाद एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित करेंगे और भारत की पदक तालिका में एक और उपलब्धि जोड़ेंगे।