शिमला। हिमाचल प्रदेश ने स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में इस बार देशभर में शानदार प्रदर्शन किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की नई रैंकिंग में हिमाचल ने बड़ा सुधार करते हुए राज्यों में तीसरा स्थान हासिल किया है। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर प्रदेश पूरे देश में छठे नंबर पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि पिछले साल हिमाचल 13वें स्थान पर था, लेकिन इस बार 7 पायदान ऊपर चढ़कर टॉप राज्यों में शामिल हो गया।

स्कोर में भी हुआ बड़ा सुधार

प्रदेश का परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स स्कोर भी काफी बढ़ा है। पिछले साल जहां हिमाचल के 573.8 अंक थे, वहीं इस बार यह बढ़कर 659.2 पहुंच गए हैं। यानी एक साल में करीब 85 अंकों का सुधार हुआ है। इसी बेहतर प्रदर्शन के चलते हिमाचल को “प्रचेष्टा-2” श्रेणी में रखा गया है, जो देश में दूसरी सबसे बेहतर श्रेणी मानी जाती है। 

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शिक्षा मंत्री ने सरकार को दिया श्रेय

प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार की शिक्षा सुधार नीतियों को दिया है। उनका कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने, जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए लगातार काम किया गया, जिसका अच्छा परिणाम अब देखने को मिल रहा है।

कई क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन

  • रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल ने कई अहम क्षेत्रों में बेहतरीन अंक हासिल किए हैं।
  • समानता के क्षेत्र में 90.5 प्रतिशत अंक मिले।
  • शिक्षा तक पहुंच में 86.6 प्रतिशत अंक हासिल हुए।
  • शिक्षक शिक्षा और प्रशिक्षण में 80.3 प्रतिशत अंक मिले।

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सबसे बड़ा सुधार “लर्निंग आउटकम्स एंड क्वालिटी” में देखने को मिला। इस श्रेणी में प्रदेश का स्कोर 54.2 से बढ़कर 117.9 पहुंच गया। इसे छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता में बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है।

स्कूलों की सुविधाओं में भी सुधार

स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और आधारभूत सुविधाओं के मामले में भी प्रदेश ने अच्छा काम किया है। इस श्रेणी में हिमाचल का स्कोर 97 से बढ़कर 110.5 हो गया है। इससे साफ है कि स्कूलों में सुविधाएं पहले के मुकाबले बेहतर हुई हैं।

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जिला स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन

जिला स्तर की रैंकिंग में भी हिमाचल के ज्यादातर जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के 12 में से 11 जिले “उत्तम-3” श्रेणी में पहुंच गए हैं। हमीरपुर 417 अंकों के साथ सबसे बेहतर जिला बना है। वहीं जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 372 अंक हासिल किए हैं। हालांकि किन्नौर अभी भी “प्रचेष्टा-1” श्रेणी में बना हुआ है।

प्रशासनिक सुधार की अभी जरूरत

हालांकि प्रदेश का कुल प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन रिपोर्ट में प्रशासनिक व्यवस्था को अभी भी चिंता का विषय बताया गया है। “गवर्नेंस प्रोसेस” में हिमाचल को 130 में से सिर्फ 45.9 अंक मिले हैं। रिपोर्ट में स्कूलों की डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने, इंटरनेट आधारित प्रक्रियाएं बढ़ाने और फंड रिलीज सिस्टम को और बेहतर बनाने की जरूरत बताई गई है।

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नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा हिमाचल

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि राज्य सरकार के गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा पर लगातार फोकस का नतीजा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुसार हिमाचल अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने स्कूल शिक्षा में बड़ा सुधार दिखाया है।