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May 20, 2026

हिमाचल : 60 की उम्र में 30 KM साइकिल चला दुकान पहुंचते हैं रमेश, 40 साल से नहीं ली एक भी छुट्टी

रमेश का एक बेटा अम्ब कॉलेज में अध्यापक, दूसरा विदेश में नौकरी करता है

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ऊना। आज के दौर में जहां लोग छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी बाइक और कार का सहारा लेने लगे हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश के उपमंडल अंब के साथ लगते गांव सुंकाली के 60 वर्षीय रमेश चंद अपनी सादगी, मेहनत और अनुशासन से समाज के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

40 साल से साइकिल पर आते हैं रमेश चंद

पिछले करीब 40 वर्षों से वह हर रोज साइकिल पर अपने कार्यस्थल अम्ब पहुंचते हैं और आज भी उसी ऊर्जा और समर्पण के साथ अपना काम कर रहे हैं। रमेश चंद अम्ब स्थित एक करियाने की दुकान में पिछले चार दशकों से कार्यरत हैं।

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30 KM का सफर साइकिल पर तय

सबसे खास बात यह है कि उन्होंने सुविधा से ज्यादा मेहनत को महत्व दिया। रोजाना करीब 30 किलोमीटर का सफर साइकिल पर तय करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। मौसम चाहे भीषण गर्मी का हो, ठंड का हो या तेज बारिश और आंधी-तूफान का, रमेश चंद का हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ा।

समय के पाबंद और मेहनती इंसान

स्थानीय लोगों के अनुसार रमेश चंद हर सुबह तय समय पर घर से निकलते हैं और पूरी निष्ठा के साथ अपने काम पर पहुंचते हैं। उनकी दिनचर्या वर्षों से बिल्कुल नियमित बनी हुई है। जिस उम्र में लोग आराम को प्राथमिकता देने लगते हैं, उस उम्र में भी रमेश चंद अपनी फिटनेस और मेहनत से युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।

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40 साल से नहीं ली छुट्टी

दुकान मालिक का कहना है कि रमेश चंद ने अपने 40 साल के कार्यकाल में शायद ही कभी छुट्टी ली हो। वह हमेशा समय के पाबंद रहे हैं और उन्होंने कभी अपने काम के प्रति लापरवाही नहीं दिखाई। उनकी ईमानदारी और समर्पण ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है।

 

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शायद ही कभी पड़े बीमार

रमेश चंद की अच्छी सेहत भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी रहती है। उनका कहना है कि नियमित साइकिल चलाना ही उनकी फिटनेस और ऊर्जा का सबसे बड़ा कारण है। वह मानते हैं कि मेहनत और शारीरिक गतिविधि इंसान को न केवल स्वस्थ रखती है बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रमेश चंद शायद ही कभी बीमार पड़े हों। बढ़ती उम्र के बावजूद उनका उत्साह और काम करने का जज्बा आज भी वैसा ही है जैसा युवावस्था में था।

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परिवार संपन्न, फिर भी नहीं छोड़ी मेहनत

रमेश चंद का पारिवारिक जीवन भी खुशहाल है। उनके दो बेटे हैं। एक बेटा अम्ब कॉलेज में अनुबंध आधार पर कंप्यूटर अध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहा है। जबकि दूसरा विदेश में नौकरी करता है। परिवार आर्थिक रूप से अच्छी स्थिति में होने के बावजूद रमेश चंद ने मेहनत करना नहीं छोड़ा।

 

उनका मानना है कि इंसान को जीवन में हमेशा सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि काम से दूरी बनाकर बैठ जाना सही नहीं है। मेहनत इंसान को आत्मविश्वास देती है और जीवन में सकारात्मक सोच बनाए रखती है।

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युवाओं को दिया खास संदेश

रमेश चंद आज क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं। वह युवाओं को संदेश देते हैं कि जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत, अनुशासन और सादगी बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि आधुनिक सुविधाएं जीवन को आसान जरूर बनाती हैं, लेकिन मेहनत और संघर्ष ही इंसान की असली पहचान बनाते हैं।

सादगी और मेहनत की मिसाल

गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोग रमेश चंद की सादगी और मेहनत की मिसाल देते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि इंसान में लगन और अनुशासन हो तो उम्र कभी भी उसके हौसलों के आगे दीवार नहीं बन सकती।

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