हमीरपुर। अमेरिका और ईरान के बीच इस समय जारी तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। हालात इतने गंभीर हैं कि मध्य-पूर्व में सैन्य गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और वैश्विक स्तर पर इसके असर देखने को मिल रहे हैं।
हिमाचल की बेटी को आया विदेश से बुलावा
इसी वैश्विक उथल-पुथल के बीच हिमाचल प्रदेश की एक होनहार बेटी को विदेश से आया बुलावा आया है। हमीरपुर जिले की बेटी डॉ. अस्मिता शर्मा को अंतर्राष्ट्र्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका मिला है।
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जानें क्या है वजह?
डॉ. अस्मिता का चयन अमेरिका में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित नेशनल कप्रिहेंसिव केंसर नेटवर्क सम्मेलन में अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और देश के लिए भी गौरव का विषय बन गई है।
अस्मिता को मिला बड़ा अवसर
डॉ. अस्मिता शर्मा की उपलब्धि यहीं तक सीमित नहीं है। उन्हें अमेरिका के अलावा जापान में आयोजित होने वाले एक अन्य प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भी अपने शोध कार्य को प्रस्तुत करने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। एक ही समय में दो वैश्विक मंचों से आमंत्रण मिलना इस बात का प्रमाण है कि उनका शोध चिकित्सा जगत में कितना महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जा रहा है।
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बड़ी बीमारियों पर गहन अध्ययन
डॉ. अस्मिता का शोध कैंसर और न्यूरोलॉजिकल (स्नायु संबंधी) रोगों के आधुनिक और उन्नत प्रबंधन पर केंद्रित है। यह अध्ययन उन जटिल बीमारियों के इलाज को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिनसे दुनियाभर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं।
उनके शोध को अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम द्वारा गहराई से परखा गया। कठोर वैज्ञानिक मानकों और मूल्यांकन की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही इसे वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के योग्य माना गया।
क्यों खास है NCCN मंच?
चिकित्सा जगत में NCCN नेशनल कप्रिहेंसिव केंसर नेटवर्क को बेहद प्रतिष्ठित संस्था माना जाता है। यह संगठन विश्वभर में कैंसर उपचार की मानक गाइडलाइंस तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
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इस मंच पर शोध प्रस्तुत करना किसी भी डॉक्टर या शोधकर्ता के लिए एक बड़ी उपलब्धि होती है- क्योंकि यहां वही कार्य स्वीकार किए जाते हैं जो वैश्विक स्तर पर प्रभावी और भरोसेमंद माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, NCCN सम्मेलन में प्रस्तुति का अवसर मिलना यह दर्शाता है कि संबंधित शोध भविष्य में कैंसर के इलाज की दिशा तय करने में योगदान दे सकता है।
परिवार और गुरुओं का मिला संबल
अपनी इस बड़ी सफलता पर डॉ. अस्मिता शर्मा ने विनम्रता के साथ इसका श्रेय अपने परिवार, शिक्षकों और सहयोगियों को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अपनी माता डॉ. सुमन शर्मा और पिता डॉ. अविनाश का आभार जताया, जिनके मार्गदर्शन और समर्थन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की।
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भावुक हुई अस्मिता
इसके अलावा उन्होंने अपने दादा जी, भाई-बहनों, मित्रों और सभी शुभचिंतकों का भी धन्यवाद किया। भावुक होते हुए डॉ. अस्मिता ने कहा कि अगर परिवार का साथ, सही दिशा और लगातार प्रेरणा न मिलती, तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह पहचान हासिल करना संभव नहीं था।स
सबके लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि
हमीरपुर की इस बेटी की सफलता आज प्रदेश के युवाओं, खासकर चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से वैश्विक मंच तक पहुंचा जा सकता है-डॉ. अस्मिता शर्मा इसका जीवंत उदाहरण हैं।
