हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के होनहार अपनी प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत के दम पर दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। अब इसी धरती के एक और बेटे ने अपनी उपलब्धि से प्रदेश की शान और ऊंची कर दी है। हमीरपुर जिले के यशपाल सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं।
रंग लाई 23 साल की मेहनत
बड़सर विधानसभा क्षेत्र के वल्ह पटियाला गांव के यशपाल सिंह ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का मान सम्मान कई गुना बढ़ा दिया है। 23 वर्षों से लगातार अनुशासित सेवा के बाद उन्होंने ये सफलता हासिल की है।
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आसान नहीं था लेफ्टिनेंट बनना
गांव एक सामान्य परिवार में पले-बढ़े यशपाल सिंह का बचपन सादगी और अनुशासन में बीता। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिझड़ी में हुई, जहां से ही उनके अंदर आर्मी में जाने का जुनून पैदा हुआ।
बचपन से ही थी मेहनती
बचपन से मेहनती और लक्ष्य-केन्द्रित रहे यशपाल ने जमा दो पूरा करते ही सेना में जाने का निर्णय लिया। साल 2002 में, वे भारतीय सेना में टेक्निकल ट्रेड के तहत चयनित हुए और यहीं से उनकी सैन्य यात्रा आरंभ हुई। शुरुआत से ही अनुशासन और कड़ी मेहनत को अपनी ताकत बनाकर यशपाल ने हर तैनाती पर बेहतरीन प्रदर्शन किया।
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क्वालीफाई की लेफ्टिनेंट का कठिन कमीशन
कठिन परिस्थितियों, संवेदनशील जगहों पर पोस्टिंग और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने तकनीकी ज्ञान और धैर्य का परिचय दिया। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने लेफ्टिनेंट का कठिन कमीशन क्वालीफाई किया।
हर तैनाती पर बेहतरीन पहचान
भारतीय सेना में दो दशक से अधिक समय तक सेवा देना अपने आप में बड़ी बात है, लेकिन इस दौरान उत्कृष्ट सेवाएं देकर खुद को अलग पहचान दिलाना और भी बड़ी उपलब्धि है। यशपाल ने ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती, तकनीकी यूनिटों में अहम जिम्मेदारियां, सैनिकों के बीच लोकप्रियता और भरोसा जैसे गुणों से खुद को सिद्ध किया। इन्हीं खूबियों ने उन्हें कमीशंड अधिकारी बनने का मौका दिया, जो उनके सैन्य जीवन के लिए मील का पत्थर है।
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परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं
यशपाल के पिता सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हैं, जबकि माता डाक विभाग में कार्यरत हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने वर्षों यशपाल की कठिन सेवा को देखा है। अब जब बेटा लेफ्टिनेंट बना है, तो खुशी शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। परिवार का कहना है यशपाल ने हमेशा परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। उसकी यह सफलता हमारे लिए गर्व, सम्मान और प्रेरणा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
भारतीय सेना में जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यशपाल सिंह एक मजबूत प्रेरणा बनकर सामने आए हैं। यशपाल सिंह की यात्रा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि साधारण परिवार, सीमित संसाधन और गांव में रहने के बावजूद मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो जीवन में कोई चोटी पहुंच से बाहर नहीं।
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क्षेत्र में बधाइयों की बौछार
यशपाल की ऐतिहासिक उपलब्धि की खबर मिलते ही बड़सर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय विधायक इंद्र दत्त लखनपाल, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गांव के लोगों ने कहा यशपाल की मेहनत और सफलता ने हमारे गांव को मान-सम्मान दिलाया है। यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का पल है।
