कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा सोमवार को घोषित 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में जिला कांगड़ा के फतेहपुर उपमंडल से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है- जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। साधारण परिवेश के बीच पली-बढ़ी एक बेटी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बना ली है।

फौजी की बेटी ने किया टॉप, 

बाड़ी पंचायत के छोटे से गांव वैह गुरिया में के फौजी की बेटी रितिका पठानिया ने आर्ट्स संकाय में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में 9वां स्थान हासिल किया है। राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धमेटा की छात्रा रितिका ने 500 में से 488 अंक प्राप्त किए हैं।

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रितिका की मां हुई भावुक

बेटी की इस सफलता के बाद मां के खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। रितिका एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता सुरेन्द्र सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं- जिनकी अनुशासित जीवनशैली ने रितिका के व्यक्तित्व को मजबूत बनाया। वहीं माता उषा रानी, जो एक गृहिणी हैं ने हमेशा उसे भावनात्मक सहारा और प्रेरणा दी। परिवार के इन मूल्यों ने ही रितिका को हर चुनौती का सामना करने की ताकत दी।

 

प्रिंसिपल को था पूरा विश्वास

स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल सुनील कुमार ने बताया कि रितिका शुरू से ही एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही है। पढ़ाई के साथ-साथ उसने अन्य गतिविधियों में भी संतुलन बनाए रखा। उन्हें पहले से ही विश्वास था कि रितिका बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल छात्रा और उसके परिवार के लिए, बल्कि पूरे विद्यालय और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

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500 में से 488 अंक किए हासिल

वर्तमान में प्रिंसिपल का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे राजीव कुमार ने भी रितिका की सफलता को विद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि 488 अंक प्राप्त कर प्रदेश में 9वां स्थान हासिल करना कोई आसान बात नहीं है। यह उसकी कड़ी मेहनत, लगन और शिक्षकों के सही मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रितिका भविष्य में भी इसी तरह सफलता के नए आयाम स्थापित करेगी।

घरों के कामोंं में भी बंटाती थी हाथ

रितिका की माता उषा देवी ने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी ने हमेशा अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी। घर के कामों में हाथ बंटाने के बावजूद उसने पढ़ाई में कभी ढिलाई नहीं बरती। आज उसकी मेहनत रंग लाई है और पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। परिवार की इच्छा है कि रितिका आगे बढ़े और अपने सपनों को साकार करे।

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किसे दिया सफलता का श्रेय?

रितिका पठानिया ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने कहा कि हर कठिन समय में उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रेरणा मिली, जिससे वह अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ती रही।

प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना

रितिका का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ बेहतर करना है। दो भाइयों के बीच पली-बढ़ी रितिका ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी मुकाम तक पहुंचना संभव है।

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