नई दिल्ली। केदारनाथ धाम में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। सुबह करीब 5:20 बजे गौरीकुंड के पास एक हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक 2 साल का मासूम बच्चा भी शामिल है। यह हेलिकॉप्टर आर्यन एविएशन कंपनी का था और केदारनाथ मंदिर से श्रद्धालुओं को लेकर गौरीकुंड लौट रहा था।

 

खराब मौसम बनी हादसे की वजह


प्रारंभिक जांच में खराब मौसम को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) के मुताबिक हेलिकॉप्टर में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के दो-दो, जबकि उत्तराखंड, राजस्थान और गुजरात के एक-एक यात्री सवार थे। जैसे ही दुर्घटना की सूचना मिली, NDRF और SDRF की टीमें मौके पर राहत व बचाव कार्य में जुट गईं।

 

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चारधाम यात्रा पर हेली सेवाएं बंद


हेलिकॉप्टर के क्रैश होते ही उसमें आग लग गई और वह पूरी तरह जल गया। घटनास्थल की तस्वीरों में सिर्फ मलबा दिखाई दे रहा है। हादसे के बाद चारधाम यात्रा के लिए चल रही हेलिकॉप्टर सेवाएं फिलहाल रोक दी गई हैं।

 

CM धामी ने दिए कड़े निर्देश


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है और हेलिकॉप्टर संचालन को लेकर सख्त SOP बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब से हर उड़ान से पहले हेलिकॉप्टर की तकनीकी जांच और मौसम की सटीक जानकारी लेना अनिवार्य किया जाएगा।

 

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हेलिकॉप्टर हादसों 


यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब बीते दो महीनों में उत्तराखंड में यह तीसरा बड़ा हेलिकॉप्टर हादसा है।

 

8 मई - उत्तरकाशी:
गंगोत्री जा रहे एक हेलिकॉप्टर के क्रैश में 6 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा भागीरथी नदी के पास हुआ था। मृतकों में बरेली की मां-बेटी भी शामिल थीं।

17 मई - केदारनाथ:
एक एयर एंबुलेंस हेलिकॉप्टर लैंडिंग के दौरान असंतुलित होकर गिर पड़ा। गनीमत रही कि पायलट, डॉक्टर और नर्स तीनों सुरक्षित बच गए थे। हादसे में टेल फिन टूट गया था।

7 जून - रुद्रप्रयाग:
तकनीकी खराबी के कारण एक हेलिकॉप्टर की सड़क पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। पीछे का हिस्सा कार पर गिरा और दुकान की टीन शेड भी उड़ गई। जानमाल की बड़ी हानि बाल-बाल टली थी।

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कितनी सुरक्षित है हेली सेवा?


लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने चारधाम यात्रा की हेली सेवा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन श्रद्धालुओं के लिए यह सेवा एक राहत थी, अब वही डर और मौत की आशंका बनती जा रही है। क्या तकनीकी जांच और मौसम पूर्वानुमान को नजरअंदाज किया जा रहा है?

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