कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में ट्रैकिंग के दौरान लापता हुए दो युवकों का करीब एक महीने बाद भी पता नहीं चल पाया है। दोनों ट्रैकिंग के लिए निकले थे। मगर आज दिन तक वापस नहीं लौटे हैं।
पार्वती घाटी से 2 ट्रैकर गायब
लापता युवकों के परिजन एक महीने से बेटों के सही-सलामत घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में बचाव टीमों ने कई स्तर पर खोज अभियान चलाया गया। इसके बावजूद अभी तक दोनों के संबंध में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में आज खुलेंगे BANK या नहीं ? जानें हड़ताल से जुड़ा पूरा अपडेट
क्या पहले घाटी में हुआ कभी ऐसा?
पार्वती घाटी में पहले भी ट्रैकिंग के दौरान पर्यटकों के लापता होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। नए मामलों के बाद एक बार फिर कठिन ट्रैकिंग रूट, सुरक्षा इंतजाम और आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कैसा का पार्वती घाटी का रास्ता?
- पार्वती घाटी के कई रास्ते बेहद ऊबड़-खाबड़ और जोखिम भरे हैं।
- कई जगह संकरे रास्तों के साथ गहरी ढलान और खाइयां मौजूद हैं।
- थोड़ी सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
- घने जंगलों के कारण रास्ता पहचानना मुश्किल हो जाता है।
- खराब मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
- कई हिस्सों में नदी-नालों का बहाव भी तेज रहता है।
- बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर खतरा बढ़ जाता है।
- जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी भी ट्रैकिंग करने वालों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।
यह भी पढ़ें- सुक्खू सरकार की पंचायतों को राहत : अब खरीद सकेंगे 3 लाख तक का फर्नीचर
ट्रैक में किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञों के अनुसार-
- दुर्गम ट्रैक पर अकेले जाने से बचना चाहिए।
- स्थानीय परिस्थितियों और रास्तों की जानकारी रखने वाले अनुभवी गाइड के साथ यात्रा करना अधिक सुरक्षित रहता है।
- मौसम की स्थिति देखकर ही ट्रैकिंग का कार्यक्रम तय करना चाहिए।
- तय मार्ग से हटकर जाने से बचना जरूरी है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में चिट्टा सप्लाई करने आया था पंजाबी : पुलिस को देख लगा भागने, पहुंचा जेल
किस तरफ गया था ट्रैकर?
झारखंड के रहने वाले 24 वर्षीय मेडिकल छात्र सुकांत गुइन बीती 8 अगस्त को अकेले मलाणा की दिशा में ट्रैकिंग के लिए निकला था। इसके बाद उससे संपर्क नहीं हो पाया। उसकी तलाश में रेस्क्यू टीमों ने करीब 3700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चंद्रखणी दर्रे और आसपास के कठिन इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।
बचाव दल का क्या कहना है?
स्थानीय बचाव से जुड़े लोगों ने आशंका जताई है कि युवक किसी खड़ी ढलान से नीचे गिरा हो सकता है। जंगली क्षेत्र होने के कारण वन्यजीवों से जुड़े खतरे की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल के 2 जिलों में आज बारिश का यलो अलर्ट : ऊंची चोटियों पर होगी बर्फबारी, जानें मौसम अपडेट
पिता की सुक्खू सरकार से मांग
सुकांत के पिता ने राज्य सरकार से दुर्गम ट्रैकिंग क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने सोलो ट्रैकिंग को नियंत्रित करने के साथ ऐसे पर्यटकों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन या ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग रखी है।
ट्रैकर की आखिरी लोकेशन क्या थी?
दूसरे मामले में दिल्ली के 32 वर्षीय नरेंद्र रावत बीती 22 अगस्त को घर से निकलने के बाद लापता हो गया था। उसकी आखिरी मोबाइल लोकेशन 24 अगस्त को मणिकर्ण में दर्ज हुई थी। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया।
यह भी पढ़ें- सुक्खू सरकार बदल रही Himcare...अब इलाज के लिए मिलेगा 10 लाख तक का हेल्थ कवर
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
परिवार की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि शिकायत के बाद FIR दर्ज करने और मोबाइल से संबंधित रिकॉर्ड की जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : कबड्डी मैच में अफरा-तफरी, स्कूल का लेंटर गिरा; बच्चों समेत 23 पहुंचे अस्पताल
सिलसिलेवार पढ़ें पूरी खबर
- पार्वती घाटी में एक महीने से दो युवक लापता, तलाश के बावजूद नहीं मिला सुराग।
- मलाणा की ओर अकेले निकला 24 वर्षीय मेडिकल छात्र सुकांत गुइन गया, 3700 मीटर ऊंचाई तक चला सर्च ऑपरेशन।
- 32 वर्षीय नरेंद्र रावत की आखिरी मोबाइल लोकेशन मणिकर्ण में मिली, फिर फोन हुआ बंद।
- गहरी खाइयां, घने जंगल और उफनते नदी-नाले बनते हैं बड़ा खतरा, बरसात में चुनौती और बढ़ जाती है।
- सोलो ट्रैकिंग पर उठे सवा। परिजनों ने दुर्गम रूट पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की।
- लगातार लापता होने की घटनाओं से ट्रैकिंग रूट की निगरानी और रेस्क्यू सिस्टम पर चिंता।
- पर्यटकों को गाइड के साथ ट्रैकिंग की सलाह।
