चंबा। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा स्थित चुराह घाटी का चलुंज मोड़ शनिवार को एक ऐसी तबाही का साक्षी बना, जिसने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। इस भयानक हादसे में किसी ने अपना जवान बेटा खोया तो किसी ने भाई, किसी मासूम के सिर से मां का साया उठ गया तो कहीं पूरा परिवार ही तबाह हो गया। शनिवार की सुबह जिस किसी ने भी घटनास्थल और गांव का दृश्य देखा, उसकी रूह कांप उठी। हादसे में कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हुई, लेकिन इस त्रासदी का सबसे डरावना और दिल बैठा देने वाला मंजर चुराह के बाहला गांव में देखने को मिला, जहां एक साथ 4 लोगों के शव पहुंचे।

 

सबसे मार्मिक दृश्य उस समय था, जब जगदेव और उनकी पत्नी हरदेई की अर्थी एक साथ उठी। सात फेरों में जिंदगी भर एक-दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाने वाला यह दंपती मौत के बाद भी एक-दूसरे का हाथ थामे जैसे अंतिम सफर पर निकल पड़ा।

 

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एक साथ उठीं 4 अर्थियां, चीखों से थर्राया पूरा इलाका

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब एंबुलेंस से बाहला गांव में चार-चार शव एक साथ पहुंचे, तो पूरे क्षेत्र में ऐसा करुण क्रंदन गूंज उठा जिसे देखकर हर आंख नम हो गई। गांव के इतिहास में ऐसा खौफनाक और मातम भरा सन्नाटा लोगों ने पहले कभी नहीं देखा था। जब एक ही गांव की गलियों से एक साथ चार अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा मुंह को आ गया। पूरे गांव में हर चूल्हा ठंडा पड़ा रहा और सिसकियों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था।

 

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एक साथ हुआ पति पत्नी का अंतिम संस्कार

सात फेरे लेते वक्त एक-दूसरे का हाथ थामकर 'साथ जीने और साथ मरने' की कसमें खाने वाले जगदेव (48 वर्ष) और उनकी धर्मपत्नी हरदेई (45 वर्ष) ने मौत के मुंह में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। बाहला गांव के रहने वाले इस दंपत्ति की जिंदगी आराम से चल रही थी। शनिवार तड़के दोनों किसी काम से चंबा जाने के लिए बस में एक ही सीट पर साथ बैठे थे। लेकिन नियति के क्रूर चक्र ने कुछ ही किलोमीटर बाद दोनों को एक साथ काल के गाल में धकेल दिया। जब श्मशान घाट पर पति-पत्नी की एक साथ चिता सजाई गई और एक साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ, तो वहां मौजूद सैकड़ों लोगों के आंसू छलक पड़े।

 

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बाहला गांव के चार लोगों की मौत

हादसे ने बाहला गांव के चार अमूल्य जिंदगियों को छीन लिया। मृतकों की पहचान:

  • जगदेव (48 वर्ष), पुत्र धर्म सिंह, गांव बाहला
  • हरदेई (45 वर्ष), पत्नी जगदेव, गांव बाहला
  • देसराज (33 वर्ष), पुत्र त्रिलोचन, गांव बाहला
  • जगदेई (24 वर्ष), पुत्री हरि लाल, गांव बाहला

24 वर्षीय जगदेई और 33 वर्षीय देसराज के असमय चले जाने से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

 

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अस्पताल के बेड पर मां को तलाश रही हैं चार मासूम बेटियां

हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह भी है कि देवीकोठी निवासी नीलमा देवी की मौत के बाद उनकी चार नन्हीं बेटियां—काव्या (11 वर्ष), नेहा (10 वर्ष), प्रियंका (5 वर्ष) और हर्षिता (4 वर्ष)—अस्पताल के बेड पर गंभीर हालत में उपचाराधीन हैं। जो बच्चियां चहकते हुए अपनी मां के साथ नानी के घर जा रही थीं, वे अभी इस कड़वे सच से पूरी तरह अनजान हैं कि उनकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। तीमारदार और डॉक्टर जब भी इन बच्चियों की उदास आंखों में मां की तलाश देखते हैं, तो उनका दिल भी भर आता है।

 

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शनिवार सुबह 7 बजे का वो खौफनाक पल

बैरागढ़ से चंबा जा रही निजी बस (शर्मा बस) जब सुबह 7 बजे चलुंज मोड़ के पास पहुंची, तो अचानक बस का टाई-रॉड एंड टूट गया। अनियंत्रित होकर बस सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी। इसके बाद हर तरफ चीख-पुकार मच गई। हालांकि, संकट की इस घड़ी में स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और खून की कमी होने पर चंबा अस्पताल में रक्तदान करने के लिए लंबी कतारें लगाकर इंसानियत की मिसाल पेश की। 

 

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प्रशासन की ओर से घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं और गंभीर घायलों का टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। लेकिन बाहला गांव में पसरा यह कभी न मिटने वाला गम हमेशा इस हादसे की भयावहता की याद दिलाता रहेगा।

हादसा पीछे छोड़ गया कई सवाल

चलुंज मोड़ का यह हादसा सिर्फ आठ जिंदगियों के खत्म होने की कहानी नहीं है। यह उन परिवारों की कहानी है, जिनके घरों में अब कभी पहले जैसी रौनक नहीं लौटेगी। किसी मां का बेटा चला गया, किसी बहन का भाई, किसी बच्चे का सहारा और किसी पत्नी का जीवनसाथी। एक ही गांव से चार लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को भीतर तक हिला दिया है।

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