#हादसा
August 9, 2026
चंबा बस हा*दसे में एक और घायल महिला ने तोड़ा दम, 8 पहुंची संख्या; पति-पत्नी ने एक साथ छोड़ी दुनिया
कोई अपनों को तलाशता रहा, कोई मां के लौटने का इंतजार करता रहा
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा स्थित चुराह घाटी का चलुंज मोड़ शनिवार की सुबह एक ऐसा दुःस्वप्न बन गया, जिसकी टीस शायद दशकों तक इस क्षेत्र की फिज़ाओं में तैरती रहेगी। चीख-पुकार, अपनों की तलाश में बदहवास दौड़ती आंखें और एंबुलेंस के सायरन के बीच चुराह के बैरागढ़-चलूंज मोड़ पर हुए इस खौफनाक हादसे से एक और बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही एक और घायल महिला ने आखिरकार इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे इस दिल दहला देने वाली त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
अस्पताल के बिस्तर पर सांसे गिन रही 62 वर्षीय धर्मो देवी (पत्नी जस्सा, निवासी गांव व डाकघर घुलेई) को बेहद गंभीर हालत में डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा रेफर किया गया था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद काल के क्रूर हाथों ने उनसे जिंदगी छीन ली। इस दुखद खबर के पसरते ही पूरे चुराह इलाके में मातम की काली घटा छा गई है।
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इस त्रासदी की सबसे ज्यादा कलेजा चीर देने वाली तस्वीर उन चार मासूम बहनों की है, जो अपनी मां नीलमा देवी के साथ नानी के घर जाने की खुशी में चहक रही थीं। 11 वर्षीय काव्या, 10 वर्षीय नेहा, 5 वर्षीय प्रियंका और 4 वर्षीय हर्षिता को क्या मालूम था कि जिस मां का हाथ पकड़कर वे मायके जा रही थीं, वही हाथ रास्ते में हमेशा-हमेशा के लिए छूट जाएगा। मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचाराधीन इन मासूमों को अभी यह भी नहीं पता कि हादसे ने उनसे उनका सबसे बड़ा सहारा छीन लिया है। अस्पताल के वार्ड में उनकी टकटकी लगाए आंखें अब भी अपनी मां के पास आने का इंतजार कर रही हैं।
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ज़िंदगी के हर सुख-दुख में एक-दूसरे का हाथ थामने का वादा करने वाले जगदेव और उनकी पत्नी हरदेई ने मौत के आगोश में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। बाहला गांव के रहने वाले इस दंपत्ति ने कभी सात फेरे लेते वक्त साथ जीने और साथ मरने की कसमें खाई थीं। शनिवार सुबह चंबा की ओर जाने के लिए दोनों बस की एक ही सीट पर साथ बैठे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, बस के गहराई में गिरते ही दोनों का सफर एक साथ ही इस दुनिया से खत्म हो गया।
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धर्मो देवी के निधन की खबर जैसे ही चुराह क्षेत्र में पहुंची, शोक की एक और लहर दौड़ गई। हादसे में पहले ही कई परिवार अपने लोगों को खो चुके थे और अब एक और मौत ने दुख को और गहरा कर दिया। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है, जबकि कई घायल अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे परिजनों की चिंता लगातार बनी हुई है।
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शनिवार की सुबह करीब 7 बजे जब बस का टाई-रॉड एंड टूटने से वह खाई में गिरी, तो दूर-दूर तक चीत्कार गूंज उठी। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए घायलों को बस के मलबे से बाहर निकाला। सुबह 10 बजे से जब एंबुलेंस एक-एक कर घायलों को लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंचने लगीं, तो वहां का मंजर देखकर कठोर से कठोर दिल इंसान की आंखें भी नम हो गईं। गोद में लहूलुहान बच्चों को उठाए बिलखते परिजनों का करुण क्रंदन सुन अस्पताल में मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी।
अपार दुख और खौफ के इस मंजर के बीच इंसानियत की एक बेहद खूबसूरत मिसाल भी देखने को मिली। हादसे की खबर मिलते ही आसपास के गांवों से लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। जब चंबा ब्लड बैंक में घायलों के लिए 'बी' और 'ओ' पॉजिटिव खून की किल्लत होने लगी, तो बिना किसी स्वार्थ के दर्जनों युवा, महिलाएं और पुरुष रक्तदान करने के लिए कतारों में खड़े हो गए। डॉक्टरों ने भी दिन-रात एक करके दो घायल बच्चों के टूटे अंगों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें नया जीवन दिया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस लगातार प्रभावित परिवारों की मदद में जुटी हुई है, लेकिन जिन परिवारों के चिराग इस हादसे में बुझ गए हैं, उनके लिए यह ज़ख्म शायद कभी नहीं भर पाएगा।