चंबा। कभी बच्चों की आवाज़ों और लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले का गैहरा गांव आज पूरी तरह खामोश नजर आया। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था, घरों में चूल्हे नहीं जले और हर चेहरे पर सिर्फ एक ही दर्द दिखाई दे रहा था। भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

एक हादसे ने उजाड़ दिया पूरा परिवार

लाहड़ के समीप हुए इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की जान चली गई। हादसे की खबर गांव पहुंचते ही मातम छा गया। मृतकों के घर पर सुबह से ही रिश्तेदारों, पड़ोसियों और ग्रामीणों का तांता लगा रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि उन्हें सांत्वना देने पहुंचे लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके।

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गांव में नहीं जला चूल्हा

इस दर्दनाक घटना का असर पूरे गैहरा गांव में देखने को मिला। शोक के कारण कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। लोगों ने अपने रोजमर्रा के काम छोड़ दिए और शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा दुखद मंजर देखा है, जब एक ही परिवार की पांच अर्थियां एक साथ उठने जा रही हैं।

शव पहुंचते ही गूंज उठीं चीखें

मंगलवार रात करीब आठ बजे जब पांचों पार्थिव शरीर गांव पहुंचे तो माहौल और भी गमगीन हो गया। परिजन अपनों से लिपटकर बिलख पड़े। पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीण लगातार परिजनों को संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन इस असहनीय दुख के सामने शब्द भी कम पड़ गए।

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आज दी जाएगी अंतिम विदाई

बुधवार को गांव के पैतृक श्मशानघाट में पांचों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूरे गांव के लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे। यह हादसा सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे गैहरा गांव का ऐसा जख्म बन गया है, जिसकी टीस लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।

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