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September 9, 2026

हिमाचल : हा**दसे ने छीनी स्कूली छात्र की जिंदगी, पिता ने लाडले का करवाया अंगदान

IGMC में पांच दिन से उपाचाराधीन था हार्दिक

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में बीते सप्ताह देवत में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में घायल छात्र हार्दिक चौहान की मौत हो गई। हार्दिक ने शिमला स्थित IGMC में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

स्कूली छात्र की IGMC में मौत

हादसे के बाद से ही उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी और डॉक्टर लगातार उसे बचाने का प्रयास कर रहे थे। मगर डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद हार्दिक जिंदगी की जंग में वह हार गया।

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हादसे में घायल हुआ था हार्दिक

हार्दिक को हादसे के बाद प्राथमिक उपचार के लिए सिविल अस्पताल चौपाल ले जाया गया था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे आगे के उपचार के लिए शिमला रेफर किया था। इसके बाद उसे आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा था।

हादसे में गई थी एक बच्ची की जान

देवत में हुआ यह सड़क हादसा बेहद दर्दनाक था। स्कूल वाहन दुर्घटना में एक बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि सात अन्य बच्चे घायल हो गए थे। हादसे के बाद सभी घायल बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया था।

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परिजनों को थी ठीक होने की उम्मीद

इन घायलों में हार्दिक चौहान की हालत सबसे अधिक गंभीर बताई जा रही थी। हादसे के बाद से परिवार को उसके ठीक होने की उम्मीद थी और लगातार उसके स्वास्थ्य में सुधार का इंतजार किया जा रहा था। हालांकि, उपचार के दौरान उसकी मौत की खबर सामने आने से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

पिता ने लिया बड़ा फैसला

हार्दिक की मौत के बाद उसके पिता ने ऐसा फैसला लिया, जिसने दुख की इस घड़ी में मानवता की एक बड़ी मिसाल कायम की है। बेटे को खोने के गहरे सदमे के बावजूद उन्होंने हार्दिक के अंगदान का निर्णय लिया।

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परिवार ने करवाया अंगदान

परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था। जिस बेटे की जिंदगी बचाने के लिए परिवार और चिकित्सक लगातार प्रयास कर रहे थे, उसकी मौत के बाद भी पिता ने यह सोचकर अंगदान का निर्णय लिया कि हार्दिक के अंग किसी दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को नई जिंदगी देने में मदद कर सकते हैं।

एक परिवार का दुख...दूसरे की उम्मीद

हार्दिक के पिता का यह निर्णय इस त्रासदी के बीच एक सकारात्मक और मानवीय संदेश लेकर आया है। एक तरफ परिवार अपने बेटे को हमेशा के लिए खोने के दर्द से गुजर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंगदान के जरिए किसी जरूरतमंद व्यक्ति और उसके परिवार के जीवन में उम्मीद की किरण पैदा हो सकती है।

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अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। ऐसे में हार्दिक के परिवार की ओर से लिया गया यह निर्णय लोगों को इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित कर सकता है।

फिर उठे सड़क सुरक्षा पर सवाल

देवत में स्कूल वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और सड़क यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक बच्ची की मौके पर मौत और कई बच्चों के घायल होने के बाद अब हार्दिक की मौत ने इस हादसे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

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लगातार बना रहता है हादसों का खतरा

गौरतलब है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। संकरी और घुमावदार सड़कें, ढलान वाले मार्ग और कई जगहों पर कठिन भौगोलिक परिस्थितियां वाहन चालकों के लिए चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में स्कूल वाहनों में सफर करने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है।

परिवार ने खो दिया लाडला बेटा

हार्दिक की मौत से परिवार ने अपना एक अनमोल सदस्य खो दिया है। वहीं, उसके पिता द्वारा अंगदान का फैसला इस दुखद घटना को मानवता और संवेदनशीलता की एक मिसाल में बदल देता है। लाडले बेटे को खोने का दर्द अपनी जगह है। मगर उसके अंगों से किसी दूसरे जरूरतमंद को जीवन मिलने की उम्मीद इस परिवार के फैसले को बेहद भावुक और प्रेरणादायक बनाती है।

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