#हादसा
July 29, 2026
हिमाचल : मिंजर मेला देखने आ रही थी कीर्ति, मां-भाई कर रहे थे इंतजार; घर पहुंची देह
मां मे खूब मेहनत कर पढ़ाई बेटी, हा.दसे ने उजाड़े सपने
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुआ भीषण सड़क हादसा एक पूरे परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गया। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की तैयारियों और उत्साह के बीच यह परिवार खुशियों के साथ अपनी बेटी के घर लौटने का इंतजार कर रहा था।
मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। घर में जिस बेटी के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं, उसी बेटी का पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा तो हर आंख नम थी और पूरा इलाका शोक में डूब गया।
हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की जान चली गई। इनमें चंडीगढ़ से अपने घर लौट रही युवती कीर्ति भी शामिल थी। परिवार के लोग आने वाले दिनों में मिंजर मेले का आनंद लेने की योजना बना रहे थे। किसी ने भी नहीं सोचा था कि खुशियों का यह इंतजार कुछ ही घंटों में गहरे दुख में बदल जाएगा।
कीर्ति पढ़ाई के सिलसिले में चंडीगढ़ में रह रही थी और कुछ दिनों के लिए अपने घर लौट रही थी। उसके साथ उसके चाचा भी कार में मौजूद थे। घर पहुंचने की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। परिवार के सदस्य भी उसकी राह देख रहे थे। रास्ते में लाहड़ के समीप अचानक हुए भीषण सड़क हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया।
हादसा इतना गंभीर था कि वाहन में सवार लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते एक ही परिवार की कई जिंदगियां हमेशा के लिए थम गईं। इस दर्दनाक घटना की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातम छा गया। लोग विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि कुछ समय पहले तक जिन लोगों के घर में मेले की तैयारियों की चर्चा हो रही थी, वहां अब अंतिम संस्कार की तैयारियां होंगी।
कीर्ति बचपन से ही पढ़ाई में होनहार मानी जाती थी। वह अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर रहती थी और भविष्य में वकील बनकर अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती थी। उसकी मां सुदर्शना, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं, ने सीमित आय के बावजूद अपनी बेटी की पढ़ाई कभी रुकने नहीं दी।
आर्थिक चुनौतियां होने के बावजूद उन्होंने हमेशा बेटे और बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उनका सपना था कि बेटी अच्छी शिक्षा हासिल करे, आत्मनिर्भर बने और समाज में अपनी अलग पहचान बनाए। कीर्ति भी मां के संघर्ष को समझती थी और पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रही थी। लेकिन सड़क हादसे ने उन सभी सपनों को एक ही पल में अधूरा छोड़ दिया।
इस परिवार की पीड़ा सिर्फ इस हादसे तक सीमित नहीं है। करीब आठ वर्ष पहले भी इस परिवार ने एक बड़ा दुख झेला था। उस समय कीर्ति के पिता केसर सिंह की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। पति के निधन के बाद सुदर्शना के सामने बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी आ गई।
उन्होंने हार नहीं मानी और अकेले ही बेटे और बेटी का पालन-पोषण किया। तमाम आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास जारी रखा। परिवार धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा था, लेकिन इस दूसरी दुर्घटना ने एक बार फिर सब कुछ बिखेर दिया।
घर में छोटा भाई विशाल अपनी बहन के लौटने को लेकर बेहद उत्साहित था। दोनों ने मिंजर मेले में घूमने, खरीदारी करने और परिवार के साथ समय बिताने की कई योजनाएं बनाई थीं। भाई-बहन लंबे समय बाद साथ में त्योहार जैसा माहौल बिताने वाले थे। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जिस बहन का मुस्कुराते हुए घर पहुंचने का इंतजार हो रहा था, उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घर का माहौल, जहां कुछ समय पहले तक खुशी और उत्साह था, अब सिर्फ सन्नाटे और आंसुओं से भर गया है।
जैसे ही हादसे की सूचना गांव पहुंची, बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचने लगे। हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध नजर आया। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी की आंखें नम थीं। लोगों का कहना था कि इतना बड़ा दुख किसी भी परिवार के लिए सहन करना आसान नहीं होता।
कीर्ति को जानने वाले बताते हैं कि वह मिलनसार, मेहनती और अपने भविष्य को लेकर बेहद सकारात्मक सोच रखने वाली युवती थी। उसकी असमय मौत ने न केवल परिवार बल्कि उसके मित्रों, शिक्षकों और पूरे इलाके को गहरा आघात पहुंचाया है।
इस सड़क हादसे ने केवल पांच लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि कई अधूरे सपने भी अपने साथ ले गया। एक मां का अपनी बेटी को वकील बनते देखने का सपना, एक भाई का अपनी बहन के साथ मेले में घूमने का सपना और पूरे परिवार की खुशियां एक पल में खत्म हो गईं।