चंबा। घर में खुशियों का माहौल था। बेटी के हाथ पीले करने के सपने सजाए जा रहे थे। मगर परिवार को क्या पता था कि कुछ ही घंटों में सब कुछ बिखर जाएगा। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में हुए हादसे ने सभी को हिला कर रख दिया है।
हादसे ने छीनी खुशियां
एक ही परिवार के 6 लोगों समेत चालक की मौत से पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। महल गांव में गुरुवार को शहनाइयों की जगह चीख-पुकार सुनाई दी, क्योंकि जिस बेटी के लिए नए जीवन की शुरुआत की उम्मीदें थीं, वह सफेद कफन में लिपटकर घर लौटी।
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कुछ ही घंटों में थी सगाई
पुखरी-मसरुंड मार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 20 वर्षीय अनीता कुमारी समेत एक ही परिवार के छह लोगों की जान चली गई। अनीता धर्म सिंह की बेटी थीं और उनकी सगाई होनी थी।
हादसे में युवती की मौत
परिवार ने उसके भविष्य को लेकर कई सपने संजोए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मगर नियति देखिए, जिस दिन सगाई होनी थी उसी दिन अनीता का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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JBT की परीक्षा देकर पहुंची थी रिश्तेदार के घर
सपरोट पंचायत के उपप्रधान किशन चंद के अनुसार, अनीता ने जमा दो के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। वह पढ़ाई में होनहार थीं और अपने पैरों पर खड़ा होकर माता-पिता का सहारा बनना चाहती थीं। बुधवार को वह चंबा में JBT की परीक्षा देने के बाद सीधे रिश्तेदारी में आयोजित मुंडन संस्कार में शामिल होने पहुंची थीं।
अपने परिवार के साथ लौट रही थी वापस
धाम खाने के बाद देर रात वह अपने ताऊ चुनी लाल, देवी सिंह, मोती राम, ताई बबली देवी और कुंता देवी समेत अन्य परिजनों के साथ बोलेरो वाहन में घर लौट रही थीं। रास्ते में वाहन गहरी खाई में गिर गया और खुशियों से भरा सफर मातम में बदल गया।
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एक साथ पहुंचीं छह अर्थियां, फूट-फूटकर रोया गांव
मुंडन संस्कार की खुशियों के बीच किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित होगा। जब महल गांव में एक ही परिवार के छह सदस्यों के शव सफेद कफन में लिपटे घर पहुंचे, तो पूरे गांव में मातम छा गया। अपनों के शवों को देखकर परिजनों की चीखें सुन हर आंख नम हो गई।
परिवार का इकलौता सहारा भी छिन गया
इस हादसे में वाहन चालक मनोहर की भी मौत हो गई। वह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके पिता और भाई का पहले ही निधन हो चुका था। घर की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
वह अपनी मां, विधवा भाभी और भाई के दो बच्चों का भी सहारा थे। मगर इस हादसे ने एक पल में परिवार का इकलौता सहारा भी छीन लिया। अब उनके बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है और पत्नी के सामने जीवनभर का संघर्ष खड़ा हो गया है। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
