शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां समिट्री क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक ने एक परिवार से उसकी सदस्य छीन ली है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और दुख का माहौल है।
पानी की टंकियां देखने गई थीं सत्या
परिजनों के अनुसार, 63 वर्षीय सत्या देवी बीते रविवार सुबह करीब साढ़े सात बजे अपने मकान की छत पर पानी की टंकियों को देखने के लिए गई थीं। बताया जा रहा है कि उस समय छत पर पहले से ही बंदरों का एक झुंड मौजूद था। जैसे ही सत्या देवी छत पर पहुंचीं, बंदरों ने अचानक उनकी ओर आक्रामक रुख कर लिया।
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छत पर बंदरों ने किया हमला
बंदरों के अचानक हमलावर होने से वह बुरी तरह घबरा गईं। खुद को बचाने की कोशिश में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से सीधे नीचे आंगन में जा गिरीं। ऊंचाई से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसा इतना अचानक हुआ कि परिजनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे के बाद तुरंत पहुंचाया गया IGMC
परिजनों ने घायल अवस्था में सत्या देवी को तुरंत उपचार के लिए IGMC पहुंचाया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें HDU में भर्ती कर उपचार शुरू किया। परिवार को उम्मीद थी कि उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि वह लगातार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रहीं।
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IGMC में 6 दिन तक चला इलाज
करीब छह दिनों तक अस्पताल में उपचार चलने के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। महिला की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए अर्की ले जाया गया।
सीने में लगी थीं गंभीर चोटें
IGMC के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. प्रवीण भाटिया के अनुसार, हादसे में महिला के सीने में गंभीर चोटें आई थीं। गिरने के बाद अधिक रक्तस्राव हुआ, जिससे उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी रही। चोटों के कारण उन्हें सांस लेने में भी परेशानी होने लगी थी। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए लगातार उपचार किया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते आखिरकार उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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इलाके के लोगों में दहशत
सत्या देवी की मौत के बाद समिट्री और आसपास के क्षेत्रों में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार की शिकायतें करते आ रहे हैं। मगर समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
लोगों का फूटा गुस्सा
लोगों के अनुसार, बंदरों के झुंड अक्सर मकानों की छतों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते रहते हैं। कई बार लोग घर से बाहर निकलने और छत पर जाने से भी डरने लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि बंदरों से बचने के प्रयास में आए दिन कोई न कोई व्यक्ति गिरकर या भागते समय चोटिल हो जाता है। इसके बावजूद समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
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स्थानीय पार्षद ने मांगा स्थायी समाधान
स्थानीय पार्षद विनीत शर्मा ने भी इस दर्दनाक घटना पर चिंता जताते हुए वन विभाग और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बंदरों के आतंक से निपटने के लिए संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बंदरों का समस्या का निकाले समाधान
उन्होंने मांग की है कि वन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन आपसी समन्वय के साथ इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशें। उनका कहना है कि सिर्फ अस्थायी कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। अगर समय रहते बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की और भी गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं।
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अब छत और गलियों में निकलना भी मुश्किल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि समिट्री क्षेत्र में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। झुंड के रूप में घूमने वाले बंदर कई बार लोगों पर झपटने की कोशिश करते हैं। घरों की छतों पर रखी वस्तुओं को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ बंदर लोगों के हाथों से खाने-पीने का सामान भी छीन लेते हैं।
बच्चों-बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता
लोगों का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर है। बुजुर्गों के लिए अचानक बंदरों का सामने आ जाना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि डर और घबराहट में उनका संतुलन बिगड़ने की आशंका रहती है। सत्या देवी के साथ हुई घटना ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
