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September 5, 2026

विजिलेंस ने जमीन फर्जीवाड़े में धरा MLA सुधीर शर्मा का करीबी, 300 रजिस्ट्रियां- 400 कनाल जमीन...

विजिलेंस ने नेक राम को किया गिरफ्तार, जमीन फर्जीवाड़े में की बड़ी कार्रवाई

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Dharamshala Land Scam

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण, फर्जी राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने और करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाने के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। विजिलेंस ने इस मामले में धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के बेहद करीबी और पूर्व चालक/सहयोगी रक्कड़ निवासी नेक राम को गिरफ्तार किया है।  

 

300 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों और करीब 400 कनाल जमीन के फर्जीवाड़े की प्राथमिक जांच के बाद हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में सियासी हड़कंप मचा दिया है। पुलिस रिमांड अवधि खत्म होने के बाद आरोपी को आज दोबारा धर्मशाला की विशेष अदालत में पेश कर आगे की हिरासत मांगी जा रही है।

300 से अधिक रजिस्ट्रियां और 400 कनाल जमीन

विजिलेंस ब्यूरो ने रक्कड़ स्थित आरोपी नेक राम के घर पर छापेमारी कर जमीन और संपत्तियों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में पाया गया कि धर्मशाला और पालमपुर तहसील के अलग-अलग पटवार सर्किलों में वर्ष 2011 से 2025 के बीच नेक राम, उसकी पत्नी किरण बाला और मां मंगला देवी के नाम पर करीब 400 कनाल जमीन खरीदी गई है।

 

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करोड़ों की कोठी भी जांच के घेरे में

विजिलेंस के अनुसार नेक राम और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर करीब 400 कनाल जमीन होने की जानकारी भी जांच के दायरे में आई है। इसके अलावा रक्कड़ स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बनी कोठी के निर्माण में खर्च हुई रकम के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। विजिलेंस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी संपत्तियां खरीदने और निर्माण में इस्तेमाल धन का वास्तविक स्रोत क्या था।

सरकारी जमीन के इंतकाल में कथित हेरफेर का आरोप

विजिलेंस ने इस पूरे मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी जमीन को कथित तौर पर गलत तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम म्यूटेशन यानी इंतकाल किया गया और बाद में बिक्री, गिफ्ट डीड या अन्य दस्तावेजों के जरिए उसका हस्तांतरण किया गया। एक मामले में धर्मशाला के घनियारा, चकबन घनियारा और आसपास के क्षेत्रों की जमीन का रिकॉर्ड जांच के दायरे में है। विजिलेंस को संदेह है कि कुछ राजस्व रिकॉर्ड में कथित तौर पर बदलाव कर जमीन के मालिकाना हक अथवा कब्जे से जुड़ी प्रविष्टियां बदली गईं।

 

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पत्नी के नाम जमीन खरीदने का भी आरोप

दूसरी एफआईआर रक्कड़-सिधवारी क्षेत्र की जमीन से जुड़ी बताई जा रही है। विजिलेंस के अनुसार वर्ष 2019 में सरकारी जमीन के एक हिस्से के कथित फर्जी म्यूटेशन के बाद उसी जमीन को नेक राम की पत्नी किरण बाला के नाम खरीदे जाने की बात जांच में सामने आई है। एक अन्य संपत्ति के रिकॉर्ड में नेक राम की मां मंगला देवी का नाम कब्जाधारी के तौर पर दर्ज होने का भी उल्लेख है। इन सभी रिकॉर्ड और लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर विजिलेंस पूरे मामले की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।

 

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13 करोड़ रुपए की संपत्ति की जांच कर रही विजिलेंस

विजिलेंस ने धर्मशाला और पालमपुर तहसील के विभिन्न पटवार सर्किलों में नेक राम, उसकी पत्नी और मां के नाम खरीदी गई जमीन का रिकॉर्ड भी खंगाला है। जांच में सामने आई संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई गई है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और क्या सभी लेन-देन घोषित आय के अनुरूप थे। जांच का दायरा वर्ष 2007 से अब तक के संदिग्ध जमीन लेन-देन तक बढ़ाए जाने की बात भी सामने आई है।

विधायक सुधीर शर्मा के करीबी होने से बढ़ा राजनीतिक पारा

नेक राम की गिरफ्तारी ने इस मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्हें धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा का करीबी बताया जाता है। यही वजह है कि जमीन मामले में विजिलेंस की कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुधीर शर्मा स्वयं आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं। 

 

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घर पर दबिश, दस्तावेज जब्त; परिवार से भी पूछताछ

गिरफ्तारी से पहले विजिलेंस टीम ने रक्कड़ स्थित नेक राम के घर पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया। परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की गई है। जांच एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का मिलान कर रही है। विजिलेंस की नजर इस बात पर भी है कि कथित जमीन सौदों से वास्तविक आर्थिक लाभ किसे मिला और किसी संपत्ति के पीछे कोई वास्तविक लाभार्थी छिपा हुआ है या नहीं।

राजस्व अधिकारियों से संभावित गठजोड़ भी जांच के घेरे में

मामले की जांच केवल नेक राम और उनके परिवार की संपत्तियों तक सीमित नहीं है। विजिलेंस कथित तौर पर यह भी पता लगा रही है कि राजस्व रिकॉर्ड में यदि कोई हेरफेर हुआ तो वह किस स्तर पर हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। जाली दस्तावेज, कथित फर्जी हस्ताक्षर, मुख्तारनामा और मूल राजस्व रिकॉर्ड के गायब होने जैसे आरोपों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अब आने वाले दिनों में जमीन के सौदों, बैंकिंग लेन-देन, राजस्व रिकॉर्ड और संभावित अन्य आरोपियों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की संभावना है।

 

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कोर्ट में पेशी के बाद आगे बढ़ेगी जांच

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार नेक राम को 1 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और अदालत ने उन्हें 5 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा था। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिलने की बात कही गई है। अब आरोपी को दोबारा अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत रिमांड की मांग की जा सकती है। विजिलेंस का फोकस फिलहाल कथित जमीन घोटाले में धन के स्रोत, संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थियों और राजस्व रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर की पूरी कड़ी जोड़ने पर है।

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