शिमला। आपने फिल्मी कहानी जरूर सुनी होगी, लेकिन क्या सुनी है हिमाचल की एक महारानी की ऐसी कहानी जिसमें अपने प्रेम को जगजाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह एक ऐसी कहानी है, जो समय और स्थान की सीमाओं को पार करती है—एक अमर प्रेम कहानी, जो पेरिस की रोशनियों से शुरू होकर शिमला की ठंडी वादियों में समाप्त होती है। महारानी बिंद्रा की यह दास्तान केवल प्रेम की नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और यादों की है।

जुब्बल रियासत की राजकुमारी थी बिंद्रा

महारानी बिंद्रा, जुब्बल रियासत के राजा के भाई की संतान थीं। जब वह केवल सात साल की थीं, तो उनकी शादी कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह के छोटे बेटे परमजीत सिंह से तय कर दी गई। जगतजीत सिंह के प्रगतिशील विचारों के चलते उन्होंने बिंद्रा को शादी से पहले शिक्षा के लिए पेरिस भेजने का निर्णय लिया। इस तरह, दस वर्ष की उम्र में बिंद्रा का जीवन एक नए अध्याय में प्रवेश करता है। यह भी पढ़ें: हिमाचल में निकली बंपर भर्ती, 200 युवाओं को मिलेगी नौकरी; 19,500 मिलेगा वेतन

पेरिस में गेय से मुलाकात

पेरिस पहुँचते ही बिंद्रा की दुनिया बदल गई। वहाँ की संस्कृति, कला, और फैशन ने उन्हें मोहित कर लिया। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वहाँ उनकी मुलाकात गेय से हुई, एक आकर्षक फ्रांसीसी युवक से, जिसने उनके दिल में एक अनोखा स्थान बना लिया। धीरे-धीरे, दोनों के बीच गहरा प्रेम पनपने लगा। बिंद्रा की उम्र जब 16 साल थी, तब उनका प्रेम परवान चढ़ा।

गेय को दी प्रेम की निशानी

प्रेम के इस सफर में उन्होंने एक-दूसरे के लिए कई निशानियाँ साझा कीं। बिंद्रा ने गेय को एक सोने का सिक्का भेंट किया, जो उनके प्रेम की प्रतीक बन गया। यह सिक्का गेय के लिए अनमोल था, और उसने इसे हमेशा अपने पास रखा। जब गेय लड़ाई में चला गया, तब भी वह सिक्का उसकी जेब में था—एक यादगार प्रतीक, जो बिंद्रा के प्यार को दर्शाता था।

गेय की दर्दनाक मौत

लेकिन युद्ध ने उनकी प्रेम कहानी को दुखद मोड़ दिया। 1916 में गेय की मृत्यु हो गई, और उस समय बिंद्रा को पता भी नहीं था कि वह अपने प्रिय को अंतिम बार देख रही हैं। गेय का भाई वर्षों बाद बिंद्रा से मिलने आया और उसे वह सोने का सिक्का लौटाया, जो गेय की अंतिम याद के रूप में उसकी जेब में था। यह क्षण बिंद्रा के लिए अत्यंत भावनात्मक था; वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकीं और आँसुओं में डूब गईं। यह भी पढ़ें : हिमाचल : 10वीं पास को मिलेगी नौकरी, भरे जाएंगे 150 पद, जानें पूरी डिटेल

बिंद्रा ने अपने प्रेम के बारे में लिखा

हालांकि उनका प्रेम सफल नहीं हो सका, बिंद्रा ने इसे कभी छुपाया नहीं। उन्होंने अपने अनुभवों को एक आत्मकथा में बड़े साहस के साथ साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “पेरिस में गेय से मिला प्यार मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा था।” यह आत्मकथा न केवल उनके प्रेम की गहराई को उजागर करती है, बल्कि यह दिखाती है कि सच्चा प्रेम कभी नहीं मरता।

1970 में नहीं रही महारानी बिंद्रा

महारानी बिंद्रा का निधन 1970 में शिमला में हुआ। उनकी नाकाम प्रेम कहानी ने उन्हें केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित किया। लेकिन उनका प्रेम सदैव के लिए अमर हो गया। उन्होंने अपनी आत्मकथा के माध्यम से यह साबित किया कि प्रेम की ताकत किसी भी कठिनाई को पार कर सकती है। यह भी पढ़ें: हिमाचल में महंगी होगी बिजली, लोगों से प्रति यूनिट मिल्क सेस वसूलेगी सुक्खू सरकार महारानी बिंद्रा की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि प्रेम को छुपाना नहीं चाहिए; इसे जीना चाहिए, और इसके प्रति सच्चे दिल से स्वीकार करना चाहिए। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, सच्चा प्रेम सदैव अमर रहता है।

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