शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह कहर बरसाने लगा है। पिछले दो दिनों के दौरान प्रदेश में बादल फटने और भूस्खलन की लगातार सामने आ रही घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में पहाड़ दरक रहे हैं, सड़कें बंद हो रही हैं और नदी-नाले उफान पर हैं। ऐसे हालात के बीच मौसम विभाग की नई चेतावनी ने प्रदेशवासियों की धड़कनें और बढ़ा दी हैं।

 

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आगामी दो दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि इस मानसून सीजन में पहली बार प्रदेश के कई जिलों के लिए इतनी गंभीर चेतावनी जारी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 48 घंटे हिमाचल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

इन जिलों के लिए रेड अलर्ट, अन्य में ऑरेंज चेतावनी

मौसम विभाग ने 20 जुलाई के लिए मंडी, कांगड़ा, शिमला, सोलन, सिरमौर, हमीरपुर और ऊना जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं 21 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और कुल्लू जिलों के लिए भी रेड अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट लागू रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार कई स्थानों पर अत्यधिक बारिश दर्ज हो सकती है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

 

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फ्लैश फ्लड, बादल फटने और बाढ़ का खतरा

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आगामी दो दिनों के दौरान फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन, चट्टानें गिरने और नदियों-नालों के उफान पर आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने से लोगों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहेगा। विभाग ने यह भी आशंका जताई है कि निचले क्षेत्रों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और यातायात बाधित होने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

जिला कांगड़ा में दो दिन बंद रहेंगे सभी शिक्षण संस्थान

हिमाचल में दो दिन भारी बारिश के रेड अलर्ट के चलते कांगड़ा जिला में सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने का फैसला लिया है। जिलाधीश एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अध्यक्ष हेमराज बैरवा ने यह आदेश जारी किए हैं। उन्होंने अपने आदेशों में जिले के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को 20 और 21 जुलाई तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं। शिक्षण और प्रशासनिक स्टाफ को भी इन दो दिनों के लिए उपस्थिति से छूट प्रदान की है। आदेशों के अनुसार जिले के सभी सरकारी एवं निजी स्कूल, शैक्षणिक संस्थान, तकनीकी संस्थान, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के सभी परिसर, निफ्ट कांगड़ा, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बलाहर, क्रेच केंद्र तथा आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। हालांकि आवासीय शिक्षण संस्थान इस आदेश से बाहर रहेंगे।

दो दिन में तीन जगह बादल फटे

प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच बीते दो दिनों में तीन स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। कई जगहों पर खेत, सड़कें और सार्वजनिक संपत्तियां प्रभावित हुई हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में संपर्क मार्ग भी बाधित हुए हैं। प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि पहाड़ों पर मौसम का मिजाज लगातार खतरनाक होता जा रहा है।

 

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कहीं दरक रहे पहाड़, कहीं बह रहा मलबा

चंबा, कांगड़ा, मंडी और अन्य पर्वतीय जिलों से लगातार भूस्खलन और पहाड़ दरकने की खबरें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर विशाल चट्टानें और मलबा सड़कों पर गिरने से यातायात बाधित हुआ है। कुछ क्षेत्रों में लोगों ने अपनी आंखों के सामने पहाड़ियों को भरभराकर गिरते देखा, जिससे दहशत का माहौल बन गया। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी और चट्टानें कमजोर हो चुकी हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

 

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बागवानों और किसानों के लिए भी बढ़ी चिंता

भारी बारिश का असर कृषि और बागवानी क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। तेज बारिश और भूस्खलन के कारण खड़ी फसलों, बागानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से पहाड़ी ढलानों पर स्थित खेती और बागवानी क्षेत्र अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं।

प्रशासन और विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

संभावित आपदाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासनों को सतर्क रहने को कहा है। आपातकालीन सेवाओं, राहत एवं बचाव दलों तथा स्थानीय प्रशासन को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।

 

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लोगों से अपील: अगले दो दिन बरतें विशेष सावधानी

प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और खड्डों के किनारे न जाने तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। पर्यटकों को भी यात्रा से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने को कहा गया है।

 

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हिमाचल प्रदेश में मौसम का रुख जिस तरह से लगातार आक्रामक होता जा रहा है, उसे देखते हुए आने वाले दो दिन बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माने जा रहे हैं। बादल फटने, पहाड़ दरकने और भूस्खलन की हालिया घटनाओं के बीच अब सभी की निगाहें आसमान और मौसम विभाग की अगली चेतावनियों पर टिकी हुई हैं।

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