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July 18, 2026
हिमाचल में फटा बादल, नाले में आई बाढ़ से चीन सीमा मार्ग बंद, ITBP कैंप के पास पहुंचा मलबा
मौसम विभाग ने अगले छह दिन भारी बारिश का रेड ऑरेंज अलर्ट किया है जारी
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रिकांगपिओ (किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और खराब मौसम को लेकर जारी चेतावनियों के बीच किन्नौर जिले से बादल फटने की घटना सामने आई है। जिले के मस्तरंग क्षेत्र में शनिवार शाम अचानक मौसम ने खतरनाक रूप धारण कर लिया और बादल फटने के बाद एक नाले में तेज बाढ़ आ गई। नाले में अचानक मलबे की बाढ़ ने चीन सीमा और पर्यटन स्थल छितकुल की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया।
मौसम विभाग पहले ही प्रदेश में 23 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी कर चुका है। खास बात यह है कि 20 और 21 जुलाई के लिए कई क्षेत्रों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जिससे संभावित आपदा का खतरा और बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार रक्छम पंचायत के अंतर्गत मस्तरंग क्षेत्र में अचानक बादल फटने से नाले में तेज बहाव आ गया। आईटीबीपी (ITBP) कैंप के पास हुए इस घटनाक्रम के कारण कुछ ही मिनटों में पानी के साथ भारी मात्रा में पत्थर, चट्टानें और मलबा नीचे की ओर बहने लगा। देखते ही देखते मुख्य सड़क मलबे से पट गई और छितकुल तथा चीन सीमा की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
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मलबे और चट्टानों के कारण सड़क पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। प्रशासन का कहना है कि मार्ग बहाल होने तक लोगों को पैदल आवाजाही का सहारा लेना पड़ सकता है। प्रभावित क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की टीमें पहुंच गई हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। सड़क को जल्द से जल्द खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार खराब मौसम चुनौती बना हुआ है।
बादल फटने के बाद आई बाढ़ से नाले के आसपास बड़े स्तर पर भूमि कटाव हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भू-स्खलन और भूमि धंसने का खतरा भी बढ़ सकता है। किन्नौर पहले ही इस मानसून में कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। लिप्पा खड्ड, रिस्पा नाला और रिब्बा नाले में भी बाढ़ जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में मस्तरंग की ताजा घटना ने संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 19 जुलाई से 23 जुलाई तक प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इस दौरान कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट लागू रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि इस अवधि में फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, बादल फटना, चट्टानें गिरना, पेड़ों का उखड़ना और सड़कों के बाधित होने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
संभावित खतरे को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने सभी जिला उपायुक्तों, विभागाध्यक्षों और आपदा प्रबंधन इकाइयों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। साथ ही राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र को नियमित रूप से स्थिति रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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पर्यटन विभाग को विशेष एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटकों से नदी-नालों, खड्डों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है। एचआरटीसी और निजी परिवहन संचालकों को भी जोखिम वाले मार्गों पर यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा न करने और जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
किन्नौर में बादल फटने की ताजा घटना ने यह साफ कर दिया है कि हिमाचल में मानसून अब खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। मौसम विभाग की चेतावनी और लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं को देखते हुए अगले पांच दिन प्रदेश के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है।