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July 17, 2026
शिव भक्तों का इंतजार खत्म: इस दिन से शुरू होगी मणिमहेश यात्रा, ड्रोन रखेंगे नजर; शुल्क भी बढ़ा
बाबा मणिमहेश के दर्शनों को तैयार हो जाइए, प्रशासन ने शुरू की भव्य तैयारियां
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चंबा: देश-विदेश से आने वाले लाखों शिव भक्तों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। हिमाचल प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा इस वर्ष 25 अगस्त से शुरू होकर 19 सितंबर तक चलेगी। भगवान शिव की पवित्र धाम मणिमहेश झील तक पहुंचने वाली इस कठिन लेकिन आस्था से भरपूर यात्रा को इस बार पहले से अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी की गई है। प्रशासन ने यात्रा को लेकर व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और भीड़ नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, जिनका सीधा लाभ श्रद्धालुओं को मिलेगा।
इस वर्ष की यात्रा की सबसे बड़ी खासियत हाईटेक मॉनिटरिंग व्यवस्था होगी। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि पूरे यात्रा मार्ग पर ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाएगी। ड्रोन की मदद से श्रद्धालुओं की संख्या, ट्रैफिक व्यवस्था, भीड़भाड़ वाले क्षेत्र, संभावित जोखिम वाले स्थानों और आपातकालीन परिस्थितियों पर नजर रखी जाएगी। किसी भी अप्रिय घटना या संकट की स्थिति में नियंत्रण कक्ष को तुरंत जानकारी मिलेगी और राहत एवं बचाव दल को तत्काल मौके पर भेजा जा सकेगा।
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इस बार यात्रा प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए अमरनाथ यात्रा मॉडल अपनाया गया है। प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन लगभग 5,000 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी। श्रद्धालुओं को पहले ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होगा और निर्धारित स्लॉट के अनुसार ही यात्रा पर जाने की अनुमति मिलेगी। विशेष अवसरों जैसे जन्माष्टमी और राधाष्टमी के दौरान मौसम और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण http://www.manimaheshyatra.hp.gov.in और स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया है। 1 अगस्त से आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऑनलाइन http://www.manimaheshyatra.hp.gov.in व्यवस्था लागू होने से यात्रियों को लंबी कतारों और अव्यवस्था से राहत मिलेगी तथा यात्रा मार्ग पर भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए इस वर्ष पंजीकरण शुल्क में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां श्रद्धालुओं से 20 रुपये का शुल्क लिया जाता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर सेवा देने वाली लंगर समितियों के लिए भी नई शुल्क व्यवस्था लागू की गई है। लंगर समितियों से पंजीकरण शुल्क के साथ सुरक्षा जमा राशि भी ली जाएगी ताकि यात्रा के दौरान नियमों और व्यवस्थाओं का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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मणिमहेश यात्रा को इस बार केवल सुरक्षित ही नहीं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रशासन ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन, सिंगल यूज प्लास्टिक पर नियंत्रण और यात्रा मार्ग की स्वच्छता के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को भी साथ जोड़ा जाएगा। यात्रा के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों और संस्थाओं को प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।
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प्रशासन ने संबंधित विभागों को यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं। यात्रा मार्ग की सड़कों की मरम्मत, पेयजल आपूर्ति, अस्थायी शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली व्यवस्था और संचार नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न पड़ावों पर चिकित्सा और आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
उन श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर है जो कठिन पैदल यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं। प्रशासन ने इस बार भी हेली टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यात्रा शुरू होने के साथ ही हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू कर दी जाएगी, जिससे बुजुर्गों और दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।
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इस बार की मणिमहेश यात्रा आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम बनने जा रही है। ड्रोन निगरानी, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, सीमित संख्या में नियंत्रित प्रवेश और पर्यावरण संरक्षण जैसे कदम यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे में बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार पहले से बेहतर सुविधाएं और अधिक सुरक्षित यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है।