शिमला/किन्नौर। हिमाचल प्रदेश में मानसून ने इस बार राहत से ज्यादा दहशत का संदेश दिया है। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही बादल फटने, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और सड़कों के ध्वस्त होने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा असर किन्नौर जिले में देखने को मिला है, जहां एक ही रात में चार अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।
मानसून सीजन शुरू होने के मात्र तीन दिनों के भीतर ही प्रदेश में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे हालातों ने लोगों के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि यदि मानसून की शुरुआत ही इतनी भयावह है तो आगामी दिनों में स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
किन्नौर में 4 जगह फटे बादल
सीमांत जिला किन्नौर में चोलिंग, रिब्बा, लिप्पा और रिस्पा क्षेत्र मानसूनी कहर का केंद्र बने रहे। पहाड़ों पर बादल फटने के बाद नालों में अचानक उफान आ गया और देखते ही देखते पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा नीचे आबादी और सड़कों तक पहुंच गया। कई स्थानों पर लोगों को रात के अंधेरे में घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।
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चोलिंग में एनएच-5 पर मलबे का पहाड़, वाहन फंसे
सबसे बड़ी घटना चोलिंग क्षेत्र में सामने आई, जहां पहाड़ियों पर बादल फटने से तीक्ष्मति नालांग में भीषण बाढ़ आ गई। बाढ़ अपने साथ लाखों टन मलबा लेकर आई, जिसने भारत-तिब्बत मार्ग के रूप में प्रसिद्ध राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 को पूरी तरह बंद कर दिया। इस दौरान सड़क से गुजर रहे दो वाहन मलबे में फंस गए। इनमें एक वाहन पंजाब से आए पर्यटक का भी बताया जा रहा है। अचानक हुई इस घटना से मार्ग पर लंबा जाम लग गया और सैकड़ों यात्री घंटों तक फंसे रहे।
छह घंटे की जंग के बाद खुला जीवनरेखा मार्ग
राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण की मशीनरी ने तड़के से ही राहत एवं बहाली अभियान शुरू किया। करीब छह घंटे की लगातार मशक्कत के बाद मार्ग को यातायात के लिए बहाल किया जा सका। सड़क बंद होने के दौरान प्रशासन और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने फंसे यात्रियों को चाय, पानी और नाश्ते की व्यवस्था उपलब्ध कराई, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली।
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रिब्बा में घरों और बागानों तक पहुंचा बाढ़ का पानी
रिब्बा गांव में बादल फटने के बाद हालात और भी चिंताजनक हो गए। रात के समय पहाड़ियों से आया बाढ़ का पानी और मलबा सीधे रिहायशी क्षेत्र में घुस गया। कई परिवारों को पूरी रात भय के साये में बितानी पड़ी। सेब के पौधों, बागानों और अन्य नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि मेहनत से तैयार की गई फसलें कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गईं।
लिप्पा और रिस्पा में टूटा संपर्क, सिंचाई व्यवस्था प्रभावित
लिप्पा क्षेत्र के पेजर नाले में आई बाढ़ ने ग्रामीणों की चार सिंचाई कूल्हों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे खेती और बागवानी पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। वहीं रिस्पा गांव के पास नाले में आए तेज बहाव ने सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे गांव का संपर्क प्रभावित हुआ और लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई।
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तीन दिन में 11 लोगों की मौत
प्रदेश में मानसून का यह शुरुआती दौर ही जानलेवा साबित हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार केवल तीन दिनों के भीतर विभिन्न हादसों में 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 12 लोग घायल हुए हैं। कहीं पहाड़ों से पत्थर गिरने से मौत हुई, कहीं करंट लगने से लोगों ने जान गंवाई, तो कहीं फिसलकर खाई में गिरने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। लगातार बढ़ते हादसों ने लोगों की चिंता और भय दोनों को बढ़ा दिया है।
बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त
चंबा, शिमला, कांगड़ा, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और अन्य जिलों में भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर नालों में उफान आने से सड़कें बह गईं, जबकि भूस्खलन के कारण यातायात बार-बार बाधित हो रहा है। प्रदेशभर में एक राष्ट्रीय राजमार्ग सहित करीब 60 सड़कें बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बिजली और पेयजल सेवाओं पर भी संकट
भारी बारिश और भूस्खलन का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। प्रदेश में 24 घंटे के दौरान भारी वर्षा और भूस्खलन से 49 सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि 42 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति बाधित है। वहीं जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे कई गांवों और कस्बों में पेयजल संकट गहराने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी ने बढ़ाई बेचैनी
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। कई जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और बादल फटने जैसी घटनाओं का खतरा अभी बना रहेगा। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
शुरुआत ऐसी तो आगे क्या होगा?
हिमाचल प्रदेश में मानसून के शुरुआती तीन दिनों ने ही डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। किन्नौर में चार स्थानों पर बादल फटना, अचानक आई फ्लैश फ्लड, सड़कों का टूटना, फसलों का नुकसान और लगातार बढ़ती मौतों की संख्या लोगों को भयभीत कर रही है। गांवों और कस्बों में यही चर्चा है कि जब मानसून का आगाज ही इतने भयंकर रूप में हुआ है तो इसके पूरे सीजन के दौरान हालात कितने चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन, मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के सामने आने वाले दिनों में बड़ी परीक्षा रहने वाली है।
