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August 16, 2026

हिमाचल में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, अगले दो दिन कई जिलों में भूस्खलन-फ्लैश फ्लड की चेतावनी

मौसम विभाग ने दो दिन भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी की

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rain alert

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर रौद्र रूप दिखाने की तैयारी में है। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले दो दिनों के लिए कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 17 और 18 अगस्त को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन और लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के कारण पहले ही राज्यभर में 118 सड़कें बंद हैं, जबकि भूस्खलन, अचानक बाढ़ और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है।

दो दिन फिर बरसेगा आसमान, इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने सोमवार 17 अगस्त को बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और मंडी में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं 18 अगस्त को ऊना, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट रहेगा। इन जिलों में कुछ स्थानों पर कम समय में तेज बारिश होने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

 

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118 सड़कें बंद, मंडी और कुल्लू सबसे ज्यादा प्रभावित

लगातार बारिश का असर प्रदेश की सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में 118 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इनमें मंडी की 48, कुल्लू की 32, चंबा की 11, सिरमौर की आठ, शिमला की सात, कांगड़ा की छह, ऊना की चार और लाहौल-स्पीति की दो सड़कें शामिल हैं। बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क पर मलबा आने और भूस्खलन की घटनाओं से यातायात प्रभावित हुआ है।

फ्लैश फ्लड का खतरा, नदी-नालों से दूर रहने की सलाह

मौसम विभाग ने भारी बारिश के बीच संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा भी जताया है। तेज बारिश के दौरान खड्डों, नालों और छोटी नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों के आसपास जाने से बचने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है। निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है।

 

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पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ा

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खिसकने और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। कमजोर ढलानों वाले क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद अचानक मलबा सड़क पर आ सकता है। इससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ सड़क किनारे बसे लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

216 जलापूर्ति योजनाएं और 19 ट्रांसफार्मर प्रभावित

मानसून की बारिश से प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार बारिश के कारण 216 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि 19 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश के चलते ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को बिजली-पानी से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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मानसून में अब तक 972 करोड़ का नुकसान

प्रदेश में 30 जून को मानसून के आगमन के बाद से बारिश से जुड़ी घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। अधिकारियों के अनुसार मानसून सीजन में अब तक करीब 972 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है, जबकि बारिश से संबंधित घटनाओं में 79 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें भूस्खलन से हुई मौतें भी शामिल हैं और अचानक आई बाढ़ में भी जान गई है।

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तेज हवाओं और बिजली चमकने का भी अलर्ट

बारिश के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं और गरज-चमक भी परेशानी बढ़ा सकती है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में तेज हवाएं चलने की संभावना है, जबकि निचले और मध्य पहाड़ी इलाकों में भी आंधी-तूफान और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है। ऐसे मौसम में लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

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