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August 13, 2026

हिमाचल में अगले 7 दिन मानसून का दिखेगा रौद्र रूप ! कल ऑरेंज अलर्ट पर कई जिला; सावधान रहें लोग

मानसून में अब तक 177 की गई जा*न, 955 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

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heavy rain alert

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश इस बार जमकर कहर बरपा रही है। पहाड़ दरक रहे हैं, भूस्खलन से सड़कें बंद हो रही हैं और नदी-नाले उफान पर बह रहे हैं। लगातार बारिश के बीच प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों ने तबाही मचा रखी है। अब मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी राहत के बजाय चिंता बढ़ाने वाला पूर्वानुमान जारी किया है। प्रदेश में अगले सात दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जबकि कल यानी 14 अगस्त को कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

 

मानसून की मार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस सीजन में अब तक आपदाओं और हादसों में 177 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश को करीब 955.52 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। बारिश के कारण सड़क, बिजली और पेयजल जैसी जरूरी सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

 

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अगले सात दिन मौसम बिगाड़ सकता है हालात

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के पूर्वानुमान के मुताबिक 14 से 20 अगस्त तक प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। 14, 17 और 18 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं 15, 16 और 19 अगस्त को भी कई क्षेत्रों में तेज बारिश होने के आसार हैं। इसके बाद 21 से 27 अगस्त के बीच बारिश की तीव्रता में कमी आने का अनुमान है। हालांकि इससे पहले आने वाले करीब एक सप्ताह में प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम चुनौतीपूर्ण रह सकता है।

14 अगस्त को ऑरेंज अलर्ट, कई जिलों में खतरा

मौसम विभाग ने 14 अगस्त को मंडी और सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं ऊना, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा में यलो अलर्ट की चेतावनी दी गई है। 15 अगस्त को बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश की संभावना है। इसके बाद 16 अगस्त को कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और शिमला में बारिश तेज हो सकती है। 17 अगस्त से मानसून के फिर सक्रिय होने का अनुमान है। इस दिन सिरमौर, कांगड़ा और ऊना में ऑरेंज अलर्ट, जबकि चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन में यलो अलर्ट जारी किया गया है। 17 और 18 अगस्त को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश हो सकती है।

 

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ढली में पहाड़ी से गिरीं चट्टानें, तीन गाड़ियों को नुकसान

बारिश के बीच राजधानी शिमला में भी पहाड़ों के दरकने का सिलसिला देखने को मिला। ढली सब्जी मंडी के सामने पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें सड़क पर आ गिरीं। इस दौरान वहां खड़ी तीन गाड़ियां चट्टानों की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं। चट्टानों के अचानक गिरने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पहाड़ी पर बने मकानों के नीचे से गुजरने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ। गनीमत रही कि चट्टानों की चपेट में आने से किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।

 

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मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें और पेयजल योजनाएं प्रभावित

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार बारिश ने प्रदेश के बुनियादी ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। सुबह के समय प्रदेश में करीब 200 सड़कें और 45 बिजली ट्रांसफार्मर बंद थे। शाम तक स्थिति में कुछ सुधार हुआ और बंद सड़कों की संख्या घटकर 136 तथा प्रभावित ट्रांसफार्मरों की संख्या 9 रह गई। लेकिन पेयजल योजनाओं की स्थिति ने चिंता बढ़ा दी। सुबह जहां 39 पेयजल योजनाएं प्रभावित थीं, वहीं शाम तक यह आंकड़ा बढ़कर 242 पहुंच गया। इनमें मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 48 सड़कें और 212 पेयजल योजनाएं बंद हैं। कुल्लू में 37 और शिमला में 26 सड़कें बंद हैं।

 

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आसमानी बिजली का कहर, 200 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत

बारिश और खराब मौसम के बीच किन्नौर से भी बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। रूपी वैली के श्री कंडे में आसमानी बिजली गिरने से 200 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत हो गई।
घटना रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है। इस घटना में भेड़पालक गुमान सिंह को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम और बिजली गिरने की घटनाओं ने पशुपालकों की चिंता भी बढ़ा दी है।

मानसून में अब तक 177 मौतें, 955 करोड़ का नुकसान

प्रदेश में इस मानसून सीजन की तबाही के आंकड़े भी भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं में 77 लोगों की मौत हुई है, जबकि सड़क हादसों में 100 लोगों की जान जा चुकी है। इस तरह अब तक कुल 177 लोगों की मौत दर्ज की गई है। वहीं सरकारी और निजी संपत्ति सहित विभिन्न विभागों को अब तक 955.52 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। लगातार बारिश से सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं, बिजली व्यवस्था और दूसरी आधारभूत सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।

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