शिमला। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ता टकराव अब चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। जंगलों का क्षेत्र और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होने के साथ ही जंगली जानवर रिहायशी इलाकों और खेत-बगीचों तक पहुंचने लगे हैं। कभी जंगलों तक सीमित रहने वाले भालू अब कई इलाकों में इंसानी
बस्तियों के आसपास दिखाई दे रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि भालुओं के हमले से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है।
अकेले भालुओं ने 93 लोगों को बनाया निशाना
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश में भालुओं के हमलों में 93 लोग घायल हुए हैं, जबकि छह लोगों की मौत हुई है। ये आंकड़े प्रदेश में बढ़ते मानव-भालू संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं। भालू अब सिर्फ जंगलों में दिखाई देने वाला वन्यजीव नहीं रह गया है, बल्कि कई ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी के लिए खतरा बनता जा रहा है।
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चंबा और शिमला सबसे ज्यादा प्रभावित
भालू के हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में चंबा और शिमला शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक चंबा में पिछले तीन वर्षों में भालू के हमलों में 35 लोग घायल हुए, जबकि दो लोगों की मौत हुई। वहीं शिमला जिले में 34 लोग भालू के हमलों में घायल हुए और दो लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
कांगड़ा में भी दो लोगों की मौत
कांगड़ा जिले में भी भालू के हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। यहां तीन लोग घायल हुए, जबकि दो लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा कुल्लू में 11 लोग भालू के हमलों का शिकार हुए हैं। मंडी में छह, सिरमौर में दो, सोलन में एक और किन्नौर में एक व्यक्ति भालू के हमले में घायल हुआ है।
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इस साल भी थम नहीं रहा सिलसिला
भालुओं के हमलों का खतरा मौजूदा अवधि में भी बना हुआ है। वर्ष 2025-26 में शिमला में 15 लोग भालू के हमले में घायल हुए, जबकि चंबा में 12 लोगों को भालुओं ने घायल किया। इसके अलावा कुल्लू में तीन, मंडी में दो तथा सोलन, कांगड़ा और किन्नौर में एक-एक व्यक्ति भालू के हमले का शिकार हुआ।
जंगलों से बाहर क्यों निकल रहे हैं भालू?
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में मानवीय दखल, प्राकृतिक आवास में बदलाव और भोजन-पानी की उपलब्धता में परिवर्तन वन्यजीवों को इंसानी आबादी के करीब ला सकता है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जंगलों और बस्तियों के बीच की दूरी कई जगह बेहद कम है। ऐसे में जब जंगली जानवर भोजन की तलाश में नीचे की ओर आते हैं तो उनका सामना इंसानों से होने की आशंका बढ़ जाती है।
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खेत और बगीचे भी बन रहे हैं निशाना
भालुओं का खतरा केवल लोगों पर हमले तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में ये जानवर किसानों और बागवानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेतों और बगीचों में पहुंचकर भालू फसलें और फलदार पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
मानव जीवन की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से भालू प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ रेस्क्यू रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं। वन क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और किसी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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गांवों में चल रहा जागरूकता अभियान
वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को सावधान रहने की सलाह दे रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि यदि कहीं भालू दिखाई देता है तो उसके करीब जाने, उसे घेरने या उकसाने की कोशिश न करें। सुरक्षित दूरी बनाए रखना और तत्काल वन विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
