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August 30, 2026
हिमाचल में मानसून ने दिखाए तेवर, अगले चार दिन भारी बारिश का अलर्ट, सावधान रहें लोग
हिमाचल में बारिश के साथ चलेंगी तेज हवाएं, बिजली चमकने का भी खतरा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में कुछ दिनों की राहत के बाद मानसून एक बार फिर तेवर दिखाने लगा है। प्रदेश में आने वाले चार दिन मौसम के लिहाज से भारी रहने वाले हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 31 अगस्त से 3 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान बारिश के साथ तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और बिजली कड़कने की भी चेतावनी दी गई है।
रविवार को राजधानी शिमला समेत प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई। शिमला में शाम के समय हुई तेज बारिश के बाद पहाड़ धुंध की चादर में लिपट गए। लगातार बारिश के कारण पहले से आपदा की मार झेल रहे प्रदेश में लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है।
लगातार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने हिमाचल में भारी नुकसान किया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार प्रदेश में 64 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इसके अलावा 226 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित होने से कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित है, जबकि 9 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
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मानसून के दौरान अब तक प्रदेश को 1184.78 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। लोक निर्माण विभाग को सबसे ज्यादा 897.58 करोड़ रुपये और जल शक्ति विभाग को 258.61 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है। 30 जून से 30 अगस्त तक प्राकृतिक आपदाओं में 104 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 149 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
बारिश और भूस्खलन का असर ऐतिहासिक कालका-शिमला रेललाइन पर भी पड़ा है। 120 साल पुरानी कालका-शिमला हेरिटेज रेललाइन के नीचे से मिट्टी बहने के कारण रविवार को सभी 10 टॉय ट्रेन सेवाएं रद्द करनी पड़ीं। रेललाइन की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी खिसकने और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
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मौसम विभाग ने 31 अगस्त से 3 सितंबर तक अलग-अलग जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर भी जारी रहने की संभावना है।
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मौसम विभाग ने सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है। 30 अगस्त से 5 सितंबर तक मैदानी, निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली कड़कने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, 31 अगस्त से 3 सितंबर तक किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में लोगों को खुले क्षेत्रों में जाने, पेड़ों के नीचे खड़े होने और बिजली चमकने के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।
भारी बारिश के बीच जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए सिरमौर के गिरि जटोंन बांध और किन्नौर/शिमला क्षेत्र के नाथपा बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। प्रशासन ने निचले और मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। लोगों को नदी, खड्ड, नाले और अन्य जल निकायों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
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मौसम विभाग ने संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, मलबा गिरने और कीचड़ खिसकने की आशंका जताई है। भारी बारिश के दौरान कुछ जल स्रोतों और नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी पैदा हो सकती है। वहीं, पहाड़ी सड़कों पर फिसलन और कम दृश्यता के कारण वाहन चालकों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
प्रदेश में पहले ही मानसून की बारिश ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में अगले चार दिनों के अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। लोग नदी-नालों और खड्डों के किनारे जाने से बचें और भूस्खलन की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही न करें। वाहन चालक भी बारिश के दौरान गति नियंत्रित रखें और मौसम खराब होने पर यात्रा को टालने का प्रयास करें।