शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले एक हफ्ते तक मौसम खराब बना रहेगा।
आज तेज बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट
आज और कल राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ तेज तूफान और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है।
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10 जिलो में यलो अलर्ट
इसके अलावा किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। जहां मौसम के बिगड़ने की संभावना तो है, लेकिन खतरा अपेक्षाकृत कम आंका गया है।
तेज आंधी-तूफान चलेगा
मौसम विभाग का कहना है कि निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है। जबकि, ऊंचाई वाले इलाकों खासकर लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊपरी हिस्सों में बर्फबारी होने के आसार हैं। कई स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं।
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कई दिन खराब रहेगा मौसम
पूर्वानुमान के मुताबिक 8 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम लगातार खराब बना रहेगा। हालांकि 5 से 7 अप्रैल के बीच कोई औपचारिक चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन इन दिनों भी मौसम साफ नहीं रहेगा। आठ अप्रैल को पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के और अधिक सक्रिय होने की संभावना जताई गई है, जिसके चलते एक बार फिर से भारी बारिश-ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
प्रदेशवासियों के लिए एडवाइजरी जारी
मौसम विभाग ने प्रदेशवासियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर जाने से परहेज करने की सलाह दी गई है।
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लाहौल-स्पीति प्रशासन ने भी एहतियात बरतते हुए अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि इस क्षेत्र की पहाड़ियां, चंद्रा नदी के आसपास के इलाके और ढलानदार हिस्से हिमस्खलन और मलबा गिरने के लिहाज से बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
तापमान में गिरवाट दर्ज
लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है। आमतौर पर अप्रैल के महीने में जहां गर्मी दस्तक देने लगती है, वहीं इस बार ठंड का असर अभी भी बना हुआ है, खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में।
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किसानों-बागवानों की बढ़ी चिंता
इस बदले हुए मौसम ने किसानों और बागवानों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। इस समय प्रदेश में सेब की फसल में फूल आने का दौर चल रहा है, जो बेहद संवेदनशील अवस्था होती है।
फसलों को पहुंच रहा नुकसान
ऐसे समय में साफ मौसम की जरूरत होती है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। कई क्षेत्रों से ओलों के कारण बागों को नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे बागवानों को आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
