शिमला। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन विकास निगम यानी HPTDC के अंतर्गत आने वाले 14 होटलों को निजी हाथों में सौंपने की योजना को लेकर सरकार ने अब यू-टर्न ले लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे पर स्पष्ट संकेत दिए कि सरकार इस प्रस्ताव को लेकर पुनर्विचार के मूड में है।
विरोध में थे होटल कर्मचारी
जानकारी के अनुसार, यह फैसला तब आया जब पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस कदम का विरोध जताया और संभावित निजीकरण से होने वाले नुकसान की ओर उनका ध्यान खींचा।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार ने नया सिस्टम किया लागू, अब सिर्फ इन कर्मचारियों को मिलेगा गजेटेड अफसर का दर्जा
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मसले को गंभीरता से देख रही है और निगम के मुनाफे में चल रहे होटलों को किसी भी हालत में निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा। उन्होंने संघ को अगले गुरुवार को विस्तृत चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।
निगम को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस दौरान निगम अध्यक्ष आर.एस. बाली के हालिया बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वे निजीकरण के पक्ष में नहीं हैं। सुक्खू ने यह भी दोहराया कि सरकार का लक्ष्य निगम को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, न कि इसे निजी कंपनियों के हवाले कर देना। इस बीच, पर्यटन निगम कर्मचारी संघ पहले ही इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल चुका था।
यह भी पढ़ें : लाडले ने दुनिया को कहा अलविदा, परिवार ने अंगदान कर 3 लोगों को दिया नया जीवन
संघ ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर यह योजना लागू की गई तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। संघ का तर्क है कि जिन 14 होटलों को निजी हाथों में देने की बात हो रही है, वे सभी लाभ में चल रहे हैं और यदि इन्हें आउटसोर्स किया गया तो इससे न केवल निगम को नुकसान होगा, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी टूटेगा।
इन 14 होटलों पर निजीकरण का खतरा
- होटल हिलटॉप स्वारघाट
- होटल लेकव्यू बिलासपुर
- होटल बघाल वडालाघाट
- वेसाइड एनीनिटी भराड़ीघाट
- होटल ममलेश्वर चिंदी
- होटल एप्पल ब्लॉसम फगू
- होटल शिवालिक परवाणु
- होटल गिरिगंगा खड़ापत्थर
- होटल चांशल रोहड़ू
- टूरिज्म इन राजगढ़
- होटल सरसती कुल्लू
- होटल ओल्ड रोज कॉमन कसौली
- काश्मीरी हाउस धर्मशालाहोटल
- ऊडल जोगिंद्रनगर
पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर
पर्यटन निगम कर्मचारी महासंघ के महासचिव राजकुमार ने सरकार के प्रस्ताव को गलत ठहराते हुए कहा कि निजीकरण के चलते पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से यह मांग की कि इन होटलों की माली हालत का दोबारा आकलन किया जाए और फिर कोई निर्णय लिया जाए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : उफनती नदी में गिरी कार, पानी के तेज बहाव में बह गया बच्चा- 2 ने मौके पर तोड़ा दम
बहरहाल, सरकार और कर्मचारी संघ के बीच अब गुरुवार को बातचीत प्रस्तावित है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और समाधान प्रस्तुत करेंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया सकारात्मक संकेत कर्मचारियों के लिए राहत की बात है, जो लंबे समय से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे थे।
