शिमला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पोंग डैम से हर वर्ष बरसात के दौरान भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से प्रदेश को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। विधानसभा में शुक्रवार को इंदौरा के विधायक मलेंद्र राजन द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह जानकारी दी।
के खिलाफ दर्ज करवाई एफआईआर
मुख्यमंत्री ने बताया कि संसारपुर टैरेस में BBMB प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद डैम सिक्योरिटी के सभी उपाय BBMB द्वारा नहीं अपनाए जा रहे हैं, जिससे निचले क्षेत्रों में हर साल भारी तबाही हो रही है।
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पानी हमारा, विस्थापित भी हम हुए, अब सहन नहीं करेंगे
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में भावुक होते हुए कहा कि पानी भी हमारा है और हम ही सबसे अधिक विस्थापित हुए हैं, फिर भी हमें हमारा हक नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रही है, जिसकी सुनवाई सितंबर माह में होनी है। सीएम ने कहा कि प्रदेश की तीन प्रमुख परियोजनाएं भाखड़ा, पोंग और नंगल BBMB के अंतर्गत आती हैं, लेकिन इन परियोजनाओं के निर्माण में हिमाचल के लोगों ने अपनी भूमि, घर और आजीविका खोई। हजारों लोग विस्थापित हुए, मगर आज तक उन्हें समुचित राहत नहीं दी गई।
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हर साल बर्बाद होती हजारों हैक्टेयर जमीन
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में अब तक पौंग डैम से अनियंत्रित जल छोड़ने के कारण 50 से 60 हैक्टेयर कृषि भूमि और उसमें खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। इस दौरान फतेहपुर क्षेत्र में 4 मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुए, 4 आंशिक रूप से टूटे और 38 गोशालाएं ध्वस्त हो गईं। 23 प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। वहीं इंदौरा क्षेत्र में 100 हैक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में भी पोंग डैम से जल छोड़ने के कारण 10 हजार हैक्टेयर जमीन जलमग्न हुई थी और 81 मकान व 45 गोशालाएं तबाह हो गई थीं।
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BBMB को करनी चाहिए नुकसान की भरपाई
सीएम सुक्खू ने कहा कि बीबीएमबी को हर साल हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए, लेकिन पड़ोसी राज्य इसमें अड़चनें पैदा कर रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व, हक और सम्मान की लड़ाई है।
डैम सिक्योरिटी गाइडलाइनों का पालन नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर डैम सिक्योरिटी कमेटी द्वारा निर्धारित गाइडलाइनों का पालन नहीं किया जा रहा है। ऊर्जा निदेशालय लगातार BBMB को इस ओर सचेत करता रहा है, लेकिन अनुपालन नहीं हो रहा। डैम से अचानक पानी छोड़ने की वजह से निचले इलाकों में तबाही होती है और स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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केंद्र सरकार पर लगाया आंख मूंदने का आरोप
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल सरकार BBMB के पास लंबित ₹4200 करोड़ के एरियर का मामला बार-बार उठाती रही है, लेकिन केंद्र आंखें मूंदे बैठा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से फॉरेस्ट क्लीयरेंस एक्ट (FCA) के तहत एक बीघा तक की शक्तियां राज्य को देने की मांग भी की है, ताकि आपदा राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।
