शिमला। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सत्ता संभाले लगभग चार साल का समय पूरा हो चुका है, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कैबिनेट में एक मंत्री पद आज भी खाली चल रहा है। अब जब सुक्खू सरकार के मौजूदा कार्यकाल को केवल एक साल का समय शेष बचा है, तब कैबिनेट में बड़े फेरबदल और खाली पद पर नए विधायक को मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं अचानक तेज हो गई हैं। इन अटकलों को उस समय और बल मिल गया जब खुद प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने सुक्खू कैबिनेट में फेरबदल और बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के स्पष्ट संकेत दे दिए।
राजीव भवन में कांग्रेस का रणनीतिक मंथन
राजधानी शिमला स्थित राजीव भवन में शनिवार से प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दो दिवसीय संगठनात्मक चिंतन शिविर शुरू हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, पंचायत चुनावों के परिणामों और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। पार्टी नेतृत्व का फोकस जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने पर है।
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मंत्रिमंडल विस्तार पर हाईकमान की नजर
बैठक से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने स्पष्ट संकेत दिए कि मंत्रिमंडल में खाली पड़े पद को भरने और संभावित फेरबदल को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर मंथन के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल जल्द हिमाचल दौरे पर आ सकते हैं। उनके दौरे के दौरान संगठनात्मक और राजनीतिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा होने की संभावना है।
अंतिम वर्ष में राजनीतिक समीकरण साधने की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के अंतिम वर्ष में प्रवेश करते ही कांग्रेस नेतृत्व क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में कदम उठा सकता है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए किसी विधायक को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज हो गई है।
वेणुगोपाल संभालेंगे कमान
प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने साफ किया कि मंत्रिमंडल में खाली पद को भरने और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में अंतिम और निर्णायक फैसला लेने के लिए कांग्रेस के केंद्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल जल्द ही धर्मशाला आने वाले हैं। धर्मशाला के इस अहम दौरे के दौरान वेणुगोपाल पार्टी की सभी राजनीतिक मामलों की समितियों के साथ बंद कमरे में उच्च स्तरीय बैठक करेंगे।
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संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर
दो दिवसीय बैठक में पंचायत चुनावों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर संगठन की ताकत और कमजोरियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने, नए नेतृत्व को अवसर देने और चुनावी तैयारियों को समय रहते मजबूत करने पर विशेष जोर दे रहा है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
किन्नौर विवाद सुलझाने की भी कवायद
बैठक के दौरान किन्नौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सामने आए विवाद पर भी चर्चा हुई। प्रदेश प्रभारी ने संकेत दिए कि संबंधित नेताओं के बीच संवाद स्थापित कर मतभेद दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि संगठनात्मक एकता प्रभावित न हो और चुनावी तैयारियों पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा सके।
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राम मंदिर चंदा विवाद पर भी बनेगी रणनीति
कांग्रेस नेतृत्व ने राम मंदिर चंदा विवाद को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इस मामले में पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई अनियमितता सामने आई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अग्रणी संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें
चिंतन शिविर के दूसरे दिन महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, किसान कांग्रेस, सेवादल, अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग सहित विभिन्न अग्रणी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठन विस्तार की रणनीति पर विचार-विमर्श होगा।
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दो दिन चलेगा दिग्गजों का जमावड़ा, कल मोर्चा संभालेंगे विंग्स
इस महामंथन के पहले दिन उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार सहित सुक्खू मंत्रिमंडल के सदस्य और विधायक विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रदेश कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा ने बताया कि यह दो दिवसीय विचार-विमर्श आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए संगठन को एक नई दिशा और आक्रामक ऊर्जा प्रदान करेगा। रविवार को मंथन के दूसरे दिन महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल, एनएसयूआई, किसान कांग्रेस, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक विभाग जैसे सभी अग्रणी विंग्स के प्रमुखों के साथ अलग से बैठकें की जाएंगी ताकि चुनावी साल से पहले पूरी पार्टी को एक सुर में खड़ा किया जा सके।
