#राजनीति
August 9, 2026
RDG बंद होने से नुकसान झेल रहा हिमाचल : CM सुक्खू बोले- PM मोदी ने किए खोखले वादे
RDG बंद होने से हर साल हजारों करोड़ का असर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राजस्व घाटा अनुदान यानी RDG बंद होने और आपदा के बाद केंद्र की ओर से घोषित वित्तीय सहायता नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर हिमाचल के आर्थिक हितों से जुड़ा हुआ है।
सीएम सुक्खू ने विपक्षी दलों और प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केंद्र के सामने हिमाचल के अधिकारों की आवाज मजबूती से उठाएं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल की जरूरतें और वित्तीय चुनौतियां मैदानी राज्यों से अलग हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राजस्व घाटा अनुदान की व्यवस्था समाप्त होने से हिमाचल प्रदेश को हर साल लगभग 8 से 10 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय संसाधनों का नुकसान हो रहा है।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्त वर्ष 2026-27 से राज्यों के लिए RDG की व्यवस्था समाप्त हो गई है। हिमाचल लंबे समय से इस अनुदान का लाभ लेने वाले राज्यों में रहा है। ऐसे में इसकी समाप्ति से राज्य सरकार के सामने अपने खर्च और आय के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद कठिन हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध करवाने में अपेक्षाकृत अधिक खर्च आता है। ऐसे में राज्य को मिलने वाली केंद्रीय वित्तीय सहायता का महत्व और बढ़ जाता है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का मुद्दा भी उठाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, 9 सितंबर 2025 को हिमाचल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद प्रधानमंत्री ने इस सहायता की घोषणा की थी, लेकिन राज्य सरकार के मुताबिक यह राशि अभी तक प्रदेश को प्राप्त नहीं हुई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आपदा के लिए घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता और RDG दो अलग-अलग वित्तीय व्यवस्थाएं हैं।
RDG का संबंध राज्यों के राजस्व घाटे की भरपाई से था, जबकि 1,500 करोड़ रुपये की घोषणा आपदा से हुए नुकसान के संदर्भ में की गई विशेष वित्तीय सहायता से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने केंद्र की ओर से की गई घोषणाओं को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि हिमाचल को अपने हिस्से का वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रदेश की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध करवाने की मांग दोहराई। सुक्खू का कहना है कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर लगातार बढ़ता वित्तीय दबाव राज्य के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली सहायता केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से कहा कि हिमाचल से जुड़े वित्तीय मुद्दों को दलगत राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब बात प्रदेश के आर्थिक हितों और अधिकारों की हो तो सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र के सामने हिमाचल की मांग मजबूती से रखने के लिए सरकार के साथ विपक्ष और अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों में कमी का असर अंततः प्रदेश के विकास और जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। फिलहाल RDG की समाप्ति, आपदा राहत राशि और हिमाचल के वित्तीय अधिकार आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल होते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि सरकार इन मामलों को केंद्र के समक्ष लगातार उठाती रहेगी और हिमाचल के हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगी।