शिमला/चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच अब टैक्स को लेकर नई खींचतान शुरू होती नजर आ रही है। हिमाचल सरकार द्वारा बाहरी राज्यों की गाड़ियों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले के बाद अब पंजाब सरकार  ने भी जैसे को तैसा का रुख अपना लिया है। पंजाब सरकार भी जवाबी कदम उठाने पर विचार कर रही है। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच चल रहे इस टैक्स.टैक्स के खेल का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। रोजाना सीमा पार कर आने.जाने वाले लोगों और पर्यटकों के लिए सफर महंगा हो सकता है।

सुक्खू सरकार ने बढ़ाया बाहरी गाड़ियों का टैक्स

दरअसल हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए राज्य में प्रवेश करने वाली बाहरी गाड़ियों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत छोटी गाड़ियों पर पहले जहां करीब 70 रुपये टैक्स लिया जाता था, उसे बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। वहीं बड़े और व्यावसायिक वाहनों के लिए यह टैक्स 720 रुपये से बढ़ाकर लगभग 900 रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी अप्रैल महीने से लागू होने जा रही है।

 

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पंजाब विधानसभा में गूंजा मुद्दा

हिमाचल के इस फैसले की गूंज पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में सुनाई दी। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कड़े तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि पंजाब सरकार अब हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगी।  वित्त मंत्री हरपाल सिंह ने साफ कहा है कि यदि हिमाचल हमारी गाड़ियों पर टैक्स लगा सकता हैए तो पंजाब भी हिमाचल के नंबर वाली गाड़ियों पर भारी एंट्री टैक्स लगाने की संभावनाओं को तलाशेगा। जिसके लिए हम कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं।

 

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हिमाचल की गाड़ियों पर पंजाब लगाएंगे टैक्स

हालांकि उन्होंने यह भी का कि एक राष्ट्र एक टैक्स के दौर में ऐसे कदम संघीय ढांचे के खिलाफ हैं। सरकार अब स्थानीय निकायों और लोक निर्माण विभाग के साथ मिलकर इस टैक्स का खाका तैयार करने की योजना बना रही है और यदि नियमों के तहत संभव हुआ तो जवाबी कदम उठाया जा सकता है।

दो राज्यों की खींचतान के बीच पिस जाएगा आम आदमी

दोनों राज्यों के बीच शुरू हुई इस टैक्स खींचतान को लोग जैसे को तैसा की स्थिति के रूप में देख रहे हैं। यदि पंजाब भी हिमाचल की गाड़ियों पर टैक्स लागू करता है तो इसका असर उन हजारों लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना कामकाज, व्यापार या अन्य कारणों से दोनों राज्यों के बीच यात्रा करते हैं। खासकर सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ सकता है।

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लोगों की प्रतिक्रिया आई सामने

सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे सरकारों के बीच चल रही आर्थिक प्रतिस्पर्धा बता रहे हैं] जबकि आम नागरिकों का कहना है कि ऐसे फैसलों का सबसे ज्यादा असर आम यात्रियों पर ही पड़ता है। लोगों का मानना है कि अगर दोनों राज्यों ने एक-दूसरे पर टैक्स लगाना शुरू किया तो रोजाना यात्रा करने वालों के लिए सफर काफी महंगा हो जाएगा।

 

एक तरफ हिमाचल अपनी 'खराब वित्तीय स्थिति' का रोना रो रहा है, तो दूसरी तरफ पंजाब इसे 'अन्याय' बताकर जवाबी हमला कर रहा है। इस 'टैक्स वॉर' ने यह साफ कर दिया है कि जब दो राज्यों की नीतियां टकराती हैं, तो नुकसान सिर्फ और सिर्फ उस आम नागरिक का होता है जिसकी कमाई का बड़ा हिस्सा अब इन बेमतलब के टैक्सों की भेंट चढ़ने वाला है।

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